कोविड खत्म होने के बाद उद्योग जगत वापसी कर रहा है और इस बार उसे सरकार से भी बहुत उम्मीदें हैं। एक फरवरी बुधवार को केंद्रीय बजट (Budget 2023) आने वाला है और उद्योग जगत की उम्मीदें हैं कि सरकार बेहतर नीतियां लाएगी ताकि व्यापार तेजी से आगे बढ़े। अमर उजाला से बातचीत में प्रमुख औद्योगिक संगठनों ने इस पर अपनी बात रखी।
क्लस्टर डवलपमेंट पर ध्यान दें, छोटे उद्योगों की मदद बढ़ाएं
एसोसिएशन ऑफ मध्यप्रदेश इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष योगेश मेहता ने कहा कि हमारी मांग है कि उद्योगों के लिए लगने वाले कॉर्पोरेट टैक्स को 22 से 15 प्रतिशत तक करना चाहिए। इससे उद्योगपतियों को कोविड से उबरने में इससे सहायता मिलेगी। नए उद्योगों में प्रस्तावित छूट की समय सीमा भी बढ़ाना चाहिए। यह एक वर्ष के लिए दी गई थी जो 31 मार्च 2023 को ही खत्म हो रही है जबकि बीच में फिर से कोविड आ गया था। इसलिए इसे एक साल और बढ़ाना चाहिए। एमएसएमई को फंडिंग बढ़ाना चाहिए और क्लस्टर विकास पर ध्यान देना चाहिए। इससे उद्योगों के लिए बेहतर माहौल बनेगा।
देश के सभी होटलों में जीएसटी की समान दरें लागू करे सरकार
वेस्टर्न इंडिया के होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन के चेयरमैन सुमित सुरी ने बताया कि कोविड में होटल इंडस्ट्री सबसे बुरी तरह प्रभावित हुई और हमें सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। हमने सरकार को सुझाव दिए हैं कि सेक्शन 115 के तहत मिनिमम अल्टरनेट टैक्स में छूट बढ़ाना चाहिए। इसमें दो साल और छूट मिलना चाहिए जिसे अप्रैल 2023 से मार्च 2025 तक करना चाहिए। इसके साथ होटल इंडस्ट्री में इन्वेस्टमेंट बढ़ाने के लिए सेक्शन 35 एडी के तहत मिलने वाले फायदों को सभी के लिए खोलना चाहिए अभी यह दो स्टार होटल और उनसे बड़े प्रोजेक्ट के लिए है। देश के हर होटल में 12 प्रतिशत का जीएसटी लगना चाहिए। सभी जगह यह एक समान होना चाहिए।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर बजट बढ़ाना चाहिए
सीआईआई (कॉन्फिडरेशन इंडस्ट्रीज ऑफ इंडिया) वेस्टर्न रीजन के चेयरमैन सुनील चोरडिय़ा ने बताया कि बजट की नीतियां 2047 को ध्यान में रखकर बनाना चाहिए। भारत अर्थव्यवस्था में महाशक्ति बनने की राह पर है। बजट में सबसे अधिक ध्यान मानव जीवन की गुणवत्ता पर होना चाहिए। स्वास्थ्य, शिक्षा पर खर्च बढ़ाना चाहिए। बजट ऐसा हो जो निवेशक और करदाता के साथ आम आदमी को भी प्रभावित कर सके।
चार बिंदुओं पर टिका अर्थव्यवस्था का भविष्य
पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी ने चार बिंदुओं के आधार पर बताया कि अर्थव्यवस्था का भविष्य कैसे बेहतर होगा।
1. महंगाई : आज महंगाई तेजी से बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितयों में भारतीय उद्योग अभी कमजोर स्थिति में हैं। ऐसे में जीएसटी की दरों को कम करना होगा। 2 और 18 की श्रेणी को 9 और 15 करते हैं तो इससे उपभोक्ता के पास बचत होगी। खरीदारी बढ़ेगी तो बाजार में डिमांड बढ़ेगी और इससे प्रोडक्शन बढ़ेगा। इससे टैक्स भी बढ़ेगा क्योंकि खरीदारी बढ़ेगी तो सरकार को फायदा उतना ही होगा।
2. बेरोजगारी : रोजगार बहुत कम हैं और बेरोजगारी को कम करने के लिए रोजगार देने वाले उद्योगों को टारगेट करें और उन्हें अधिक इन्सेन्टिव दें। एमएसएमई ज्यादा रोजगार देते हैं। उनके लिए ऋण मिलने और सस्ता ऋण मिलने के लिए जरूरी नीतियां बनाएं। उनके लिए बैकों के नियमों में ढील दें। उन्हें क्रेडिट लाइन की समस्या आती है और उन्हें ब्याज भी ज्यादा देना पड़ता है। जबकि बड़े उद्योगों को कम ब्याज लगता है।
3. निवेश : देश में निवेश तेज करने के लिए सोलर एनर्जी में विभिन्न स्तर पर छूट और सब्सिडी की व्यवस्था देनी चाहिए। एक्सपोर्ट को बढ़ाने के लिए सब्सिडी दें।
4. निर्यात : इसमें जो नए उद्योग हैं उन्हें चयनित करें और प्रोत्साहन दें। निर्यात बढ़ेगा तो देश में अधिक पैसा आएगा, इससे अर्थव्यवस्था तेजी से सुधरेगी।