खेतों में पानी देने के लिए बनी थी बावड़ी।
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इंदौर के जिस बेलेश्वर मंदिर की बावड़ी में 36 लोगों की मौत हुई, वहां स्थित उद्यान वर्ष 2004 में हुए भूमि हत्याकांड के कारण भी चर्चाओं में रह चुका है। यहां सास ने अपनी एक बहू की हत्या कर उसके टुकड़े बगीचे में पोटली बनाकर रख दिए थे। सिंधी समाज ने तब हत्या करने वाले परिवार का बहिष्कार कर दिया था।
उदयपुर की रहने वाली भूमि रामचंदानी की इसी इलाके में रहने वाल रामचंदानी परिवार में शादी हुई थी। पारिवारिक विवाद के चलते उसकी सास धनवंतरी रामचंदानी ने उसकी घर में ही जघन्य तरीके से हत्या कर दी थी। फिर उसके शरीर के टुकड़े टुकड़े कर पोटली में बांधे और दोपहिया वाहन पर पोटली रखकर बेलेश्वर उद्यान में फेंक कर आ गई थी।
खेत में बनी थी बावड़ी
आमतौर पर इंदौर शहर में ज्यादातर बावड़ियां होलकर काल में बनाई गई थीं। ऐतिहासिक राजवाड़ा और उसके आसपास के क्षेत्रों में ज्यादा बावड़ियां थीं। जब शहर का विस्तार हुआ तो इंदौर विकास प्राधिकरण ने अलग-अलग स्कीमें घोषित कर खेती क जमीनों पर प्लॉट विकसित किए। पटेल नगर और आसपास का हिस्सा इंदौर विकास प्राधिकरण की स्कीम-31 में शामिल था। जब स्कीम के लिए प्राधिकरण ने खेतों की जमीन अधिगृहित की थी तो उसके साथ कुएं और बावड़ियां भी स्कीम में आ गए।पटेल नगर की बावड़ी में उन्हीं में से एक है।
कुओं पर ही निर्माण कर डाला
क्षेत्र के रहवासी किशोर कोडवानी बताते है कि क्षेत्र में चार बावड़ियां हैं जिनसे वर्षों तक पानी भी सप्लाई होता था। बाद में उनकी उपयोगिता खत्म हो गई। कुछ कुओं के कारण प्राधिकरण प्लॉट नहीं बेच पाया था। बाद में कम कीमतों पर लोगों ने उन प्लाॅटों को खरीदा और कुएं पर ही निर्माण कर डाले।
35 साल पहले बेटे और पिता ने की
थी बावड़ी में कूदकर आत्महत्या
रहवासियों के अनुसार 35 साल पहले बेलेश्वर महादेव मंदिर की बावड़ी में एक पिता और पुत्र ने कूदकर आत्महत्या कर ली थी। तब बावड़ी को ढंकने का फैसला लिया गया था। पहले बावड़ी के समीप ही मूर्ति खुले में रखी गई थी और यहां हर साल लोग जोत जलाने के लिए आते थे। बाद में वहां शेड बन गया और धीरे-धीरे मंदिर ने आकार ले लिया।