टिम कुक की असमी जैन से हुई मुलाकात
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
इंदौर की असमी जैन ने पूरी दुनिया में शहर का डंका बजा दिया है। असमी ने दुनिया की शीर्ष टेक कंपनी एपल की ऐप कम्पीटिशन में चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया है। उनके ऐप को एपल के सीईओ टिम कुक ने खूब सराहा। उन्होंने यह भी कहा कि यह इनोवेशन दुनिया को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। इस प्रतिस्पर्धा में 30 देशों के छात्रों ने हिस्सा लिया था। इनमें हेल्थकेयर, स्पोर्ट्स, मनोरंजन और एनवायरमेंट से संबंधित ऐप डेवलप करने थे। इस चैलेंज का आयोजन हर साल होता है जिसमें तमाम देशों के छात्र हिस्सा लेते हैं। चार जून को अंतिम चरण में जीतने पर असमी की मुलाकात सीधे टिम कुक से हुई। इसमें टिम कुक ने भारत के बारे में कई रोचक बातों को शेयर किया। कुछ समय पहले टिम कुक एपल के स्टोर की लांचिंग के लिए भारत भी आए थे।
क्या बोले टिम कुक
टिम कुक ने असमी से बातचीत में कहा कि वे कुछ दिन पहले एपल स्टोर की लॉन्चिंग के लिए भारत आए थे। उन्होंने कहा कि भारत बहुत ही प्यारा देश है। यहां के लोग अपने हुनर के दम पर पूरी दुनिया में छा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं के इनोवेशन पूरी दुनिया को नई दिशा दिखा रहे हैं।
तकनीक से दुनिया को दिखाना है नई राह
असमी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वे तकनीक के माध्यम से दुनिया को नई राह दिखाना चाहती हैं। वे अभी कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग में थर्ड ईयर छात्रा हैं। 20 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपने इनोवेशन से पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना ली है।
क्या चैलेंज था और कैसे जीतीं असमी
एपल डब्ल्यूडब्ल्यूडीसी23 के स्विफ्ट स्टूडेंट चैलेंज में स्विफ्ट कोड लैंग्वेज का इस्तेमाल कर ओरिजनल ऐप बनाना होता है। इसमें दुनियाभर के छात्र अपने बनाए एप पेश करते हैं। असमी ने बताया कि इसमें सबसे प्रमुख चीज होती है ऐप को समझने और उपयोग में यूजर की सहूलियत। मैंने इस बात पर ध्यान दिया कि एप को तीन मिनट में कोई भी यूजर पूरी तरह से समझ ले और उपयोग कर सके।
आंखों की गंभीर समस्याओं को ठीक करता है असमी का ऐप
असमी ने एक ऐसा ऐप बनाया है जो यूजर्स की आंखों की मूवमेंट को ट्रैक कर सकता है। इस ऐप की मदद से लोग एक्सरसाइज भी कर सकते हैं। यह ऐप उनके लिए काफी मददगार है जिन्हें आंखों की गंभीर समस्या है या आंखों का पैरालिसिस है। असमी का अगला लक्ष्य एक ऐसे ऐप को तैयार करना है जिसकी मदद से लोग अपने चेहरे की एक्सरसाइज कर सकें।
कैसे आया यह आइडिया
असमी जैन के दोस्त के चाचा को मस्तिष्क की सर्जरी हुई थी जिसके बाद उन्हें आंखों में दिक्कत हुई और फिर पैरालिसिस हो गया। जैन के दोस्त के चाचा अपनी आंखों के मूव नहीं कर पा रहे थे। इसे देखते हुए असमी ने एक ऐसा एप बनाया जो यूजर्स की आंखों की मूवमेंट को ट्रैक कर सकता है।