आज की शिक्षा नीति का मूल्य उद्देश्य पैसा कमाना है। अगर यही चलता रहा तो हमारा देश कभी आगे नहीं बढ़ेगा। अच्छे देश के निर्माण के लिए शिक्षा को पैसे से मुक्त होना चाहिए। युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए हमें उन्हें कुछ हुनर सिखाना होगा। यह कहना है सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार का। रविवार को वे इंदौर में थे। गांधी हॉल में दीपक जैन ‘टीनू’ की संस्था सार्थक द्वारा नए भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका विषय पर एक प्रोग्राम का आयोजन किया गया, जिसमें आनंद कुमार शामिल हुए। उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित इंदौर की स्वच्छता को लेकर कई बातों पर अपने विचार रखे।
शहर के शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए आनंद ने कहा कि कई बार मुझे ऑनलाइन क्लासेस के ऑफर आए। मुझे करोड़ों रुपए आफर किए गए लेकिन मैंने छात्रों का भविष्य देखते हुए वह सब छोड़ दिए।राजनीति में तो अभी भी ऑफर आते रहते हैं लेकिन मैं हाथ जोड़ लेता हूं, क्योंकि एक शिक्षक बनकर ही बच्चों और शिक्षकों के बीच में जाता रहा हूं। मैं यही करना चाहता हूं।
तकनीक से डरें नहीं, वह हमें बेहतर बनाएगी
आनंद ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हमें विरोध नहीं करना चाहिए। उसे एक चुनौती और एक अवसर के रूप में लेकर उससे कुछ सीखकर बच्चों को सिखाना चाहिए। आज हम बच्चों को जो पढ़ाते हैं तो वो तुरंत सर्च कर लेता है कि मास्टरजी कहीं से चुराकर पढ़ा रहे हैं या कॉपी कर रहे हैं या नया पढ़ा रहे हैं। चैट जीपीटी या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट से भी कुछ नया हम कैसे कर सकें। उसका उपयोग करके बच्चों को कैसे कुछ सिखा सकें। इसके लिए हम लोगों को प्रयासरत रहना चाहिए। इस चैलेंज को हमें स्वीकार करना चाहिए।
इंदौर की स्वच्छता की चर्चा पटना में होती है
कितने लोग आज रोजगार की तलाश में दर दर भटक रहे हैं। युवा आज इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर, बिजनेस मैनेजमेंट की डिग्री लेकर, होटल मैनेजमेंट की डिग्री, तकनीकी शिक्षा की डिग्री, डिप्लोमा लेकर भटक रहे हैं और उन्हें अच्छी नौकरी नहीं मिल रही है। जो शिक्षा पद्धति है उसमें कहीं न कहीं थोड़ी कमी जरूर है। अगर उन कमियों को हम मिलजुल कर पूरा करें तो नया भारत बन सकता है। आनंद ने कहा कि इंदौर की स्वच्छता की चर्चा पटना में होती है। पटना में लोग धीरे-धीरे सफाई की ओर बढ़ रहे हैं। जब भी नगर निगम की बैठक होती है, उसमें उदाहरण के तौर पर इंदौर की ही चर्चा होती है।