पिता और बहन की हत्या करने वाले पुलिन धामन्दे को अपने अपराध पर कोई अफसोस नहीं है। उसने पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद कहा कि उसे घर से अच्छी तो जेल लगी। यहां कम से कम मेरे साथ कोई बात करने वाला तो होगा। उसने यह भी बताया कि पिता और बहन की हत्या के बाद वह गोवा में क्रूज पर गया था।
क्या था मामला
8 नवंबर को नौलखा इलाके के वसुधैव कुटुम्बकम् अपार्टमेंट में एसबीआई के रिटायर्ड बैंक मैनेजर कमलकिशोर धामन्दे (76) और उनकी बेटी रमा अरोरा (53) की हत्या हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने बेटे पुलिन को गिरफ्तार किया है। घटना के बाद से पुलिन लापता था। पुलिस ने उसे गोवा से पकड़ा है।
हत्या वाले दिन क्या हुआ...
पुलिन ने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन वह घर में बैठा हुआ था और पिता उसे बार-बार यही कह रहे थे कि तुझे रिहेब सेंटर भेज देंगे। वो बार-बार इस बात के लिए ही मना कर रहा था कि उसे बार बार रिहेब सेंटर क्यों भेजते हैं लेकिन, पिता उसकी सुनने को तैयार नहीं थे। वो सीधे किचन में गया और खलबत्ते में रखा मूसल उसने उठाया और पहले अपने पिता के सिर पर दे मारा। यह देख बहन भी उसकी तरफ आई तो उसने बहन के सिर पर भी जोर से मूसल दे मारी। उसे यह नहीं पता था कि इससे दोनों की मौत हो जाएगी। दोनों को खून निकलता देख वो वहीं बैठ गया। दो दिनों तक वह उनके पास ही बैठा रहा, फिर बदबू न आने के लिए उसने घर में रखा टेलकम पाउडर डाला और वहां से निकल गया। घर से निकलते समय उनसे अपने पिता के तीन एटीएम उठाए और इंदौर शहर से फरार हो गया। पहले आरोपी इंदौर से वडोदरा गया और फिर वहां से गोवा निकला गया।
पिता बाइक नहीं चलाने देते थे, खाने में बस दो रोटी मिलती थी
आरोपी 43 वर्षीय (पुल्कित) पुलिन धामंदे ने पुलिस को बताया कि मेरा जीवन पूरा मेरे पिता, बहन और मां ने खराब कर दिया है। मेरी R15 बाइक है, जिससे मैं रोज सुबह उठकर साफ करता था। दो साल से बाइक को बड़ी मुश्किल से मैंने उसे महज 200 किलोमीटर ही चला पाया हूं। पापा ने बाइक की नंबर प्लेट तक निकाल दी थी। पिता मुझसे बोलते थे कि यदि मैं बाइक से जाऊंगा तो पुलिस मुझे पकड़ लेगी। पिता और बहन मुझे हमेशा सिर्फ ताने मारते रहते थे। घर में यदि खाना खाते समय मैंने दो की जगह तीन रोटी खा ली तो उसके लिए भी मुझे ताने मारते थे। कहते थे तेरे लिए दो रोटी बनी थी। तूने एक ज्यादा क्यों खा ली।
पुलिस से कहा मैं नशा नहीं करता, आप रिहेब सेंटर में पता करिए मेरा व्यवहार कैसा था
घर मैं बैठे-बैठे यदि टीवी देखता था तो बहन और पिता टीवी भी नहीं देखने देते थे। दूसरे लोग जहां तीन महीने में अपने घर रिहेब सेंटर से वापस आ जाते थे, लेकिन मुझे 9 महीने कभी 10 महीने में भी घर लेकर कोई नहीं जाता था। पुलिन ने पुलिस से यह भी कहा कि आप रिहेब सेंटर में पता लगा सकते हैं कि मेरा व्यवहार वहां कैसा था। आरोपी ने इस बात से इंकार कर दिया की वो किसी भी तरह का नशा करता है। परिवार द्वारा घटना के बाद ही पुलिस को यह जानकारी दे दी गई थी कि आरोपी सिजोफ्रेनिया नामक बीमारी का शिकार है। जिसे (मनोरोगी) भी कह सकते हैं।
बहन और जीजा से मिलने से मना किया
सोमवार को पुलिन से मिलने उसके बहन और जीजा पहुंचे थे। पुलिन ने अपने बहन और जीजा से मिलने से मना कर दिया और पुलिस से कहा कि मैं उनका चेहरा नहीं देखना चाहता। उन लोगों ने मेरे लिए कुछ नहीं किया है। जुर्म कबूल करने के बाद पुलिस ने पुलिन को मंगलवार को जेल भेज दिया।