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इंदौर: मंत्री के समर्थक ने कलाकार को उठाया कुर्सी से, अपमान से आहत पद्मश्री पुरु दाधिच ने कहा- अब नहीं लूंगा सरकारी आयोजन में भाग

Sat, 22 Jan 2022 06:38 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

 जिस कलाकार को अतिथि का दर्जा देकर समारोह में ससम्मान बुलाया वहां उसी कलाकार का अपमान किया। उन्हें बैठने के लिए उचित स्थान तक नहीं मिला। कलाकार ने आहत होकर दुखी मन से कहा कि अब सरकारी आयोजन में भाग नहीं लूंगा।
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पद्मश्री डॉ. पुरु दाधिच - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इसे संगीत समारोह का राजनीतिकरण कहें या संगीत समारोह का सरकारीकरण। जिस कलाकार को अतिथि का दर्जा देकर समारोह में ससम्मान बुलाया वहां उसी कलाकार का अपमान किया। उन्हें बैठने के लिए उचित स्थान तक नहीं मिला। कलाकार ने आहत होकर दुखी मन से कहा कि अब सरकारी आयोजन में भाग नहीं लूंगा।
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इंदौर जैसे कला के कद्रदान शहर में यह घटना ख्यात कथक नर्तक पद्मश्री डॉ. पुरु दाधिच के साथ घटी। दरअसल इंदौर में उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा राग अमीर समारोह आयोजित किया जा रहा है। इसकी पहली शाम को यह घटना घटी। अकादमी ने डॉ. दाधिच को अतिथि के रूप में आयोजन में बुलाया था। वे तय समय पर पहुंच गए थे मगर कार्यक्रम शुरू नहीं हुआ। उनकी अगवानी भी किसी ने नहीं की। करीब आधे घंटा बाद भी जब समारोह शुरू नहीं हुआ और बैठे-बैठे उनके पैरों में तकलीफ होने लगी तो वे सभागृह के गलियारे में उठकर आ गए। उस दौरान मंत्री उषा ठाकुर वहां आ गईं। उन्हें सभागृह में जाता देख डॉ. दाधिच भी अंदर आ गए और पहली पंक्ति में दरवाजे के पास उपलब्ध कुर्सी पर बैठने लगे। इसी दौरान खुद को मंत्री का कार्यकर्ता बताने वाले व्यक्ति ने उनको वहां से उठाकर अपने साथी को बैठा दिया। इससे डॉ. दाधिच वहां से उठकर घर आ गए और अपने मन की व्यथा ऑडियो संदेश द्वारा आयोजकों तक भेजी। हालांकि इसके बाद भी दूसरे दिन समारोह में न तो आयाजकों ने उनसे इस बारे में बात की न ही मंत्री की ओर से कोई चर्चा की गई। इससे दुखी डॉ. दाधिच ने कहा कि वे कभी सरकारी आयोजन में भाग नहीं लेंगे। इस घटना की शहर में कलारसिकों ने आलोचना की और इस पर दुख भी जताया। सोशल मीडिया के माध्यम से भी घटना की निंदा की गई।

आहत होकर बोले- अब कभी नहीं जाउंगा
शनिवार को डॉ. दाधिच कार्यक्रम में पहुंचे तो असहज ही रहे। उनके साथ हुई घटना उनके चेहरे के भावों के रूप में झलक रही थी। वे इतने आहत थे कि दोपहर तक किसी से बात नहीं की। उन्होंने कहा कि मैं जयंत भिसे के उस प्रयास का सम्मान करता हूं जिसमें उन्होंने सभी कलाकारों को एकजुट करने का प्रयास किया लेकिन संस्कृति का सम्मान बाबुओं के हाथों नहीं हो सकता। जब मैं वहां गया तो अकादमी के उप निदेशक वहां थे, उन्होंने भी मुझे बैठने तक का नहीं कहा। संस्कृति मंत्री के साथ कार्य करने वाले भी संस्कृतिकर्मियों और वरिष्ठों का आदर नहीं करते। यह मेरी गलती है कि मैं सरकारी आयोजन में गया। वहां आज भी वही तरीका है जिसमें किसी की कोई पूछपरख नहीं। मैं उसी का शिकार हुआ। संकल्प लेता हूं कि अब कभी सरकारी आयोजन का हिस्सा नहीं बनूंगा। इस मामले में उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक जयंत भिसे का कहना है कि मेरे सामने घटना नहीं हुई इसलिए मुझे जानकारी नहीं है। हमको जानकारी होती तो उनसे बात करते। मंत्री ठाकुर से भी इस विषय में बात हुई तो उन्होंने कहा कि उनको भी इस बारे में नहीं पता। इंदौर पहुंचने पर वे डॉ. दाधिच से भेंट करेंगी।
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कांग्रेस नेता नरेंद्र सलूजा का ट्वीट - फोटो : सोशल मीडिया

मंत्री ठाकुर को मांगना चाहिए माफी
इधर इस मामले में शहर के कलारसिकों ने तो दुख जताया ही लेकिन कांग्रेस ने भी आलोचना की है। कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने ट्वीट किया कि इंदौर के रवींद्र नाट्यग्रह में राग अमीर संगीत समारोह में अतिथि के रूप में बुलाए गए पद्मश्री और शहर, प्रदेश-देश के गौरव पुरु दाधिच जी के साथ हुआ दुर्व्यवहार पूरे शहर का अपमान है। कला जगत का अपमान है। गुरुजी का संदेश सुना, वो इस घटना से बेहद आहत हुए। प्रदेश की मंत्री उषा ठाकुर को इस घटना के लिए गुरुजी से माफी मांगना चाहिए। इस दुर्व्यवहार की घटना के लिए अपने निजी सचिव को तत्काल हटाना चाहिए। इंदौर को संस्कारों की नगरी कहा जाता है। यहां की मेहमानवाजी की तारीफ पूरे देश में होती है। ऐसी घटनाएं शहर की छवि को  खराब करती है।
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