इंदौर में कोरोना के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शहर के लगभग सभी इलाकों में कोरोना मरीज मिल रहे हैं। राहत इस बात की है कि मरीजों में गंभीर लक्षण नहीं है तो चिंता यह है कि अब तक मिले अधिकांश मरीज एसिम्प्टोमेटिक हैं।
दरअसल इंदौर में लगातार कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दिसंबर से शुरू हुआ सिलसिला बढ़ता जा रहा है। नए साल के पहले दिन संक्रमित मरीजों की संख्या 80 पहुंच गई जबकि इसके पहले 62 मरीज मिले थे। एक्टिव मरीजों की संख्या भी बढ़कर साढ़े तीन सौ के पार पहुंच चुकी है। रविवार को जो नए मरीज मिले हैं उनके घर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और स्थिति देखी। इनके संपर्क में आए लोगों की जानकारी जुटाई। उनके भी सैंपल लिए जाएंगे। नौ मरीजों में ओमिक्रॉन वैरिएंट मिला है। ये सभी ठीक हैं।
अधिकांश मरीजों में नहीं है कोई लक्षण, ऑक्सीजन लेवल भी सामान्य
इन दिनों जो कोरोना के मरीज सामने आ रहे हैं उनको देखा जाए तो हैरानी हो रही है। सभी मरीज एसिम्प्टोमेटिक हैं। उनमें किसी तरह का गंभीर लक्षण नहीं है। खुद मरीजों का यह कहना है कि उनको न बुखार हुआ है न ज्यादा सर्दी-खांसी है, ऐसे में जांच रिपोर्ट पॉजिटिव देखकर हैरानी हो रही है। इसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी होम आइसोलेशन की व्यवस्था का कहा है। आमतौर पर कोरोना मरीजों को एमटीआरबी अस्पताल और राधा स्वामी कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया जाता है। कुछ निजी अस्पतालों में जाते हैं, लेकिन इस बार एसिप्म्टोमेटिक मरीजों की संख्या अधिक होने के चलते स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ऐसे मरीज जिनके घर में अलग से कमरे और टॉयलेट की व्यवस्था है तो उनको होम आइसोलेट किया जा सकता है। कुछ मरीजों को होम आइसोलेट किया भी गया है।
इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि दिसंबर में जिस तरह से मरीजों की संख्या बढ़ी और विभाग ने इलाज करने वाले डॉक्टरों से बात करने के साथ मैदानी स्थिति जानी तो पता चला कि अधिकांश मरीजों की हालत अच्छी है। उनका ऑक्सीजन लेवल ठीक है और बाकी कोई समस्या भी नहीं है। ऐसे में जब तक निगेटिव रिपोर्ट नहीं आती, तब तक आइसोलेशन में रखा जाता है। आमतौर पर 14 दिन के अंदर रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है। इसके चलते ऐसे मरीजों को होम आइसोलेट किया जा सकता है।
रैपिड रिस्पांस टीम को दिए हैं निर्देश
सीएमएचओ डॉ. बीएस सेत्या के अनुसार संक्रमित मरीजों की कांटैक्ट व ट्रेवल हिस्ट्री का पता लगाने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम काम कर रही है। इस टीम को निर्देश दिए हैं कि अगर मरीज में कोई लक्षण नहीं है और वह नॉर्मल है तो उसे होम आइसोलेट किया जाए बशर्ते उसके घर में अलग से कमरे और टॉयलेट की व्यवस्था हो। इस टीम द्वारा एसिम्प्टोमेटिक मरीजों को जरूरी दवाइयां भी दी जाएंगी। इनकी निगरानी रखी जाएगी। 14 दिन के अंदर दोबारा टेस्ट होगा। टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही आइसोलेशन खत्म किया जाएगा।
इंदौर के इन क्षेत्रों में मिले हैं मरीज
इधर नए मिल रहे पॉजिटिव मरीजों के मामले में जब स्वास्थ्य विभाग ने जानकारी जुटाई तो पाया कि इंदौर के अलग-अलग क्षेत्रों से ये मरीज मिले हैं। इनमें खातीवाला टैंक, प्रेम नगर, आनंद नगर, विजय नगर, स्कीम 71, महालक्ष्मी नगर, एयरपोर्ट रोड, राजेंद्र नगर, बिचौली मर्दाना, ओमेक्स सिटी, नेहरू नगर, नारायण बाग, अनूप नगर, मनोरमागंज, रेसकोर्स रोड, सिलिकॉन सिटी, स्कीम 78, एमजीएम गर्ल्स होस्टल, साकेत नगर, श्रीजी वैली, महू, आरआर कैट कॉलोनी, बीसीएम प्लेनेट, जीपीओ, रविदास नगर, कालिंदी, स्नेह नगर, बाणगंगा, एयरपोर्ट, सुखलिया, कल्पना लोक, द्वारकापुरी, राऊ, प्रकाश नगर, गोपाल बाग, संजना पार्क, बिचौली हप्सी, खजराना, तिलक नगर, चंदन नगर, विजय नगर, लसूडिया, तेजाजी नगर, अन्नपूर्णा, तुकोगंज, राजेंद्र नगर, हीरा नगर, कनाडिया, तुकोगंज, भंवरकुआ, एमआईजी, गांधी नगर, आजाद नगर, छत्रीपुरा, द्वारकापुरी, जूनी इंदौर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज भी हैं।