पापा...आपको थोड़ा सा ज्यादा समय बिताना था। हम सबके साथ बात करनी चाहिए थी। जितनी बात आप अपने भाई-बहनों से करते, उससे आधी भी करते तो चल जाता। मां समझ रहा हूं कि आप अकेली रह जाओगी, लेकिन और बर्दाश्त नहीं हो रहा। सॉरी मम्मी। मन था कहने का लिख दिया, आई क्विट...। सुसाइड नोट में काका, काकी आदि सबके स्वभाव के बारे में भी जिक्र है। इसमें लिखा है, मुझसे इतनी सारी उम्मीदें रखने से पहले मुझसे पूछ लेते यार। प्रेशर हैंडल नहीं कर पाया मैं।
ये अंश है उस सुसाइड नोट का जो आईआईटी के छात्र सार्थक विजयवत ने लिखा है। मेधावी छात्र सार्थक जीवन की चुनौतियों से हार गया और जीवनलीला समाप्त कर ली। अब घरवालों का बुरा हाल है। परिजन बदहवास हैं और किसी को यकीन नहीं हो रहा कि उनका बेटा ऐसा कर सकता है।
आईआईटी खड़गपुर का छात्र था
घटना इंदौर की है। यहां सार्थक विजयवत नामक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह आईआईटी खडग़पुर का छात्र था। उसके पिता बृजेश कुमार एनवीडीए में एडिशनल डायरेक्टर हैं। पुलिस का कहना है कि सार्थक कुछ दिन पहले ही इंदौर आया था। कहा जा रहा है कि कॉलेज प्लेसमेंट में अच्छे पैकेज की जॉब न मिल पाने के कारण वह निराश था। अवसाद में जाने के कारण उसने आत्मघाती कदम उठाया। मौत से पहले सार्थक ने दो पन्नों का सुसाइड नोट भी लिखा है। यह सुसाइड नोट अंग्रेजी में है जिसमें उसने पूरे परिवार का जिक्र किया है और खुद के बारे में भी लिखा है।
हिम्मत नहीं बची मुश्किलें झेलने की
सुसाइड नोट में सार्थक ने लिखा है- सॉरी, अब क्या बोल सकता हूं। जिन उम्मीदों से जेईई की तैयारी की थी उनके टूटने के बाद सबकुछ बिगड़ता चला गया। सोचा था कि कैंपस जाउंगा, एंजॉय करूंगा और अब ऑनलाइन असाइनमेंट में फंस गया। शायद ये टाला जा सकता था। कई लोगों के पास मौका था लेकिन कुछ नहीं किया। हिम्मत नहीं बची मुश्किलें झेलने की और कारण नहीं बचा आगे जीने का। परिवार शानदार है। पापा जिद्दी, मम्मी मजबूर। वात्सल्या मासूम। संभालू तो किस-किस को।