मध्य प्रदेश सरकार ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत से विस्थापित 28 लोगों को भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र सौंपे गए। पिछले कुछ सालों के दौरान भोपाल जिले में नागरिकता प्रदान किए गए 487 लोगों से यह 28 लोग अन्य हैं।
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भोपाल जिला प्रशासन और केंद्रीय गृह मंत्रालय इन लोगों को मंजूरी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को अपने आवास पर 28 लोगों को प्रमाण पत्र दिया। इनमें से ज्यादातर लोग दीर्घकालिक वीसा पर भारत में रह रहे थे।
स्थानीय विधायक रामेश्वर शर्मा के मुताबिक, "भोपाल में नागरिकता के 250 से ज्यादा मामले लंबित पड़े हैं जो जल्द ही हल कर लिए जाएंगे। पाकिस्तान में उत्पीड़ित सिंधी समुदाय के लोग भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर चुके हैं।''
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बीते सालों के दौरान पाकिस्तान से हजारों हिन्दू सिंधी परिवार भारत में विशेषकर मध्य प्रदेश में आ बसे हैं। ये परिवार विभाजन के बाद भारत में बस गए अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए मुलाकाती वीजा पर आते हैं। पाकिस्तान से आए ज्यादातर मुलाकाती वापस लौटना नहीं चाहते हैं और यहां अवैध रूप से यहां रहने लगते हैं।
साल 2014 में जब से भाजपा सरकार केंद्र में सत्ता में आई थी, उसने सिंधी परिवारों से आने वाले ऐसे पाकिस्तानी नागरिकों के प्रति उदारवादी रवैया अपनाया है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में लखनऊ में 52 सिंधी परिवारों को ऐसे ही नागरिकता प्रमाण पत्र बांटे थे।
इन प्रमाण पत्रों को सौंपते समय चौहान ने उन नए लोगों को नए देश के नियमों का पालन करने के लिए कहा जिसका अब वे एक हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने कहा कि अब से यह देश और शहर उनका है। उन्होंने कहा, "यदि सिंधु नदी के किनारे विकसित सभ्यता में पले-बढ़े नागरिकों को किसी कारण से अपनी जड़ें छोड़नी पड़ती हैं और हमारे देश पहुंचे हैं, तो यह देश उनका है और यहां उनका स्वागत है।"