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Mandsaur: पशुपतिनाथ में जलाभिषेक के नए नियम; गर्भ गृह में सबको नहीं मिलेगा प्रवेश, फैसले का सभी ने किया स्वागत

Fri, 11 Aug 2023 09:03 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंदसौर

सार

मंदिर प्रबंध समिति ने पशुपतिनाथ मंदिर प्रवेश द्वार पर एक बोर्ड लगाया गया है, जिसमें मंदिर के नियमों को उल्लेख किया गया है। मंदिर समिति के इस निर्णय की मंदिर के पुजारी सहित श्रद्धालुओं ने प्रशंसा की है।
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मंदिर में लगे बोर्ड की जानकारी देता सुरक्षाकर्मी। - फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
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विश्व विख्यात भगवान पशुपतिनाथ महादेव मंदिर प्रबंध समिति ने दर्शनार्थियों को सलीके के वस्त्र पहनकर ही मंदिर में प्रवेश करने की हिदायत दी है। मंदिर प्रबंध समिति ने पशुपतिनाथ मंदिर प्रवेश द्वार पर एक बोर्ड लगाया गया है, जिसमें साफ उल्लेख किया गया है कि मंदिर परिसर में मर्यादित वस्त्र पहनकर ही प्रवेश करें। अमर्यादित वस्त्र पहनकर आने पर बाहर से ही दर्शन करें। नियमों का पालन करने के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने एक बोर्ड भी प्रवेश द्वार पर लगा दिया है। मंदिर समिति के इस निर्णय की मंदिर के पुजारी सहित श्रद्धालुओं ने प्रशंसा की है।

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इस तरह के वस्त्र पहनने पर पाबंदी 
देश के कई मंदिरों के बाद अब मंदसौर के प्रसिद्ध भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में भी दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को पूरे शरीर ढककर पहने हुए कपड़े ही पहनने पर ही प्रवेश मिलेगा। मंदिर प्रबंधन समिति ने इस मामले में छोटे कपड़े पहन कर दर्शन करने वाले युवा और युवतियों के गर्भ गृह में प्रवेश और प्रतिमा के जलाभिषेक पर पाबंदी लगा दी है। समिति ने मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक बोर्ड लगाकर युवतियों और युवकों को संदेश दिया है कि वह दर्शन करते समय हाफ पैंट, बरमूडा, मिनी स्कर्ट नाइट सूट और कटी फटी जीन्स के अलावा छोटे टी शर्ट पहन कर मंदिर में प्रवेश न करें।

नियमों का पालन नहीं करने वालों को हाल से ही करने होंगे भगवान के दर्शन 
प्रवेश द्वारा पर लगे बोर्ड पर लिखे संदेश का उल्लंघन करने वाले श्रद्धालुओं को अब गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। वहीं उन्हें अब दर्शन हॉल से ही भगवान के दर्शन करने होंगे। समिति के इस फैसले को मंदिर के प्रधान पुजारी कैलाश भट्ट ने भी उचित बताया है। उन्होंने कहा कि धर्म के मुताबिक शास्त्रों में भी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर ही भगवान की पूजा अर्चना और उनके दर्शन करने का उल्लेख है। वहीं दूसरी तरफ परंपरागत कपड़ों के पहनावे को भी उन्होंने मानसिक शांति के अनुरूप बताया है। समिति के इस फैसले का महिला श्रद्धालुओं ने भी स्वागत किया है।

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