कलमनाथ के मुताबिक नई मतदाता सूची के मुताबिक मध्य प्रदेश में 24 फीसदी आबादी बढ़ी है, तो वहीं मतदाताओं की संख्या 40 फीसदी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य में चुनावों से पहले जानबूझ कर फर्जी वोटर लिस्ट बनाई गई है। उन्होंने कहा कि इस फर्जी वाड़े की शिकायत कांग्रेस कर रही है, लेकिन बीजेपी इस प्रकरण पर चुप है। उन्होंने बीजेपी पर इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने का आरोप लगाया।
'प्रजातंत्र और संविधान खतरे में'
वहीं चुनाव आयोग को शिकायत देने गए कांग्रेसी प्रतिनिधिमंडल में शामिल मध्य प्रदेश कांग्रेस कैंपेन कमेटी के इंचार्ज ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रजातंत्र और संविधान दोनों खतरे में है। उन्होंने कहा कि जो सबूत रखे जा रहे हैं, वह मध्यप्रदेश सरकार की मंशा को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि कई मतदाताओं के नाम उनके पिता के नाम समेत आसपास के कई पोलिंग बूथ में मिले हैं।
192 विधानसभाओं में की जांच
सिंधिया ने कहा कि 101 विधानसभाओं में जांच कराने पर 24 लाख 65 हजार फर्जी वोटर मिले हैं। वहीं 91 विधानसभाओं में जब जांच कराई गई, तो वहां 27 लाख फर्जी वोटर मिले। उन्होंने कहा कि 5 करोड़ की आबादी वाले मध्य प्रदेश में 12-13 फीसदी वोटर फर्जी हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर किस रणनीति के आधार पर बीजेपी यह साजिश रच रही है?
चुनाव आयोग से की 5 मांग
सिंधिया ने बताया कि चुनाव आयोग से मुलाकात के दौरान उन्होंने 5 मांगे रखी हैं, जिसमें मतदाता सूची की दोबारा जांच करके 31 जुलाई, 2018 तक नई सूची जारी की जाए। साथ ही उन्होंने जांच करने वाले रिटर्निंग अफसर के एफिडेविट देने की मांग की। साथ ही उन्होंने मांग की कि सूची में शामिल फर्जी लोगों के खिलाफ सेक्शन-32 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए और इस फर्जीवाड़े में शामिल अधिकारियों को 5-6 साल तक किसी भी चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने से रोका जाए।
पूरे देश में गड़बड़ी का अंदेशा
वहीं मीडिया से बातचीत में सिंधिया ने अंदेशा जताया कि पूरे देश की मतदाता सूची में भी कुछ ऐसी ही धांधली सामने आ सकती है। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि ऐसे राज्य जो मध्यप्रदेश की सीमा से सटे है, जिनमें छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश शामिल हैं, वहां की मतदाता सूचियों की भी जांच की जाए।