कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ज्यादा फंड जुटाने के लिए नींव तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि 1 मई को मजदूर दिवस के दिन वह देखेंगे कि वह वहां 2 करोड़ मजदूरों को एकत्रित कर पाते हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि यह एक घोटाला है जिसमें मजदरों के नाम पर फंड और फायदे लिए जा रहे हैं।
बता दें कि राज्य सरकार एक प्रोग्राम चला रही है जिसके तहत मजदूरों को घर, बैटरी से चलने वाली गाड़ी और रिक्शे के लिए सब्सिडी, उनके बच्चों के लिए शिक्षा और गर्भवती पत्नी के लिए वित्तिय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। हालांकि ज्यादातर मजदूरों का कहना है कि वह ऐसी किसी योजना के बारे में नहीं जानते और उन्हें नहीं पता है कि उनके फायदे कैसे लिए जाएं।
भोपाल में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले पंकज का कहना है कि वह अपने परिवार के 6 लोगों का पेट पालने के लिए दिन का 300 रुपये कमाता है। वहीं एक अन्य मजदूर इंदर का कहना है कि वह भी अपने परिवार के 4 लोगों का भरण पोषण करने के लिए दिन का 300 रुपये कमाता है। साथ ही इन दोनों को भी सरकार की किसी योजना के बारे में नहीं पता। इसके साथ ही पंकज ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि कब और कैसे उन्हें मजदूर की श्रेणी में पंजीकृत किया गया। वहीं इंदर ने कहा कि वह पिछले 10 साल से मजदूरी कर रहा है और उसके पास राशन कार्ड तक नहीं है तो कैसे उसे इस श्रेणी में पंजीकृत किया गया।