ग्वालियर जिले में ओलावृष्टि के बाद सड़कों पर जमा बर्फ
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मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक दर्जन से अधिक गांव में सड़कें और खेत बर्फ से पट गए। जमीन पर बिछे पड़े ओलों को देखकर ऐसा लग रहा था मानो ग्वालियर कश्मीर बन गया हो। मूसलाधार ओलावृष्टि से किसानों के खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है।
ग्वालियर-चंबल अंचल में पिछले पांच दिनों से मौसम खराब है। यहां बारिश के साथ-साथ लगातार ओलावृष्टि हो रही है, लेकिन ग्वालियर के डबरा और भितरवार के एक दर्जन गांवों में भीषण ओलावृष्टि हुई। इसने किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। यहां जमीन पर बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। सड़क, खलिहान और घर के आंगन बर्फ से ढंक गए। प्रकृति का कहर किसानों पर कुछ इस कदर टूटा कि किसने की खेतों में खड़ी फसल फसलें बर्बाद हो गईं। कछूआ गांव में पहुंचे, जहां की सड़कों , खलियानों और घरों में ओले बिछे हुए थे। गांव में रहने वाले बुजुर्गों ने कहा कि जीवन में पहली बार इस तरीके से ओलावृष्टि देखी है, जिसे देखकर हमें डर लग रहा था और बच्चे तो रो रहे थे।
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भीषण ओलावृष्टि से इस गांव में 1000 हेक्टेयर में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। ओलावृष्टि के कारण खेत तालाब में तब्दील हो चुके हैं और फसल पूरी तरह टूट गई हैं। गेहूं के पौधों से पत्तियां झड़ गई हैं सिर्फ डंठल नजर आ रहे हैं। गांव में कई किसान ऐसे हैं, जिन्होंने 40 बीघा में गेहूं की फसल की थी वह पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है तो कई किसान ऐसे हैं जो 100 बीघा में गेहूं की फसल कर रही थी, लेकिन इस ओलावृष्टि ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है। जिले के भितरवार क्षेत्र में ओलावृष्टि की सूचना मिलने पर कलेक्टर रुचिका चौहान ने भी ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा है कि एसडीएम और रिवेन्यू के समस्त स्टाफ को निर्देश दिए हैं कि ओला प्रभावित खेतों के सर्वेक्षण का कार्य तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।
भीषण ओलावृष्टि से एक दर्जन से अधिक गांव में गेहूं की फसल में भारी नुकसान