प्रदेश की सड़कों पर बड़ी संख्या में चल रहे ई-रिक्शा के संचालन को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को ई-रिक्शा के संचालन के लिए 60 दिन के भीतर राष्ट्रीय नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। वहीं मध्य प्रदेश सरकार से इस नीति को 120 दिन के भीतर लागू करने को कहा गया है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदेश में ई-रिक्शा की संख्या, रूट और संचालन के नियमों में बदलाव की उम्मीद है।
दरअसल ई-रिक्शा के संचालन से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने बताया गया कि प्रदेश में पिछले करीब 10 वर्षों से ई-रिक्शा चल रहे हैं लेकिन इनके संचालन को लेकर अब तक प्रभावी और स्पष्ट नियम नहीं बनाए गए हैं। शहरों में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या से यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को ई-रिक्शा के संचालन को व्यवस्थित करने के लिए जरूरी नियम बनाने के निर्देश दिए हैं। इसमें रूट परमिट, अलग-अलग शहरों में ई-रिक्शा की संख्या तय करना और यातायात व्यवस्था से जुड़े प्रावधान शामिल होंगे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ई-रिक्शा को मनमाने तरीके से किसी भी रूट पर चलाने पर रोक लग सकती है।
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ई-रिक्शा के डिजाइन और सुरक्षा पर भी चिंता
सुनवाई के दौरान ई-रिक्शा की डिजाइन और सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई। कोर्ट ने पलटने वाले ई-रिक्शा के डिजाइन में सुधार के लिए जरूरी नियम बनाने की जरूरत बताई है। इसका उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और दुर्घटना की स्थिति में जोखिम कम करना है।
ग्वालियर में करीब 14 हजार ई-रिक्शा
याचिका में सामने आया कि ग्वालियर शहर में करीब 14 हजार ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। इनमें यात्री ई-रिक्शा के साथ मालवाहक ई-रिक्शा भी शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा होने के कारण शहर की यातायात व्यवस्था और सड़कों पर दबाव बढ़ रहा है।
अब हाईकोर्ट के आदेश के तहत केंद्र सरकार को 60 दिन में राष्ट्रीय नीति तैयार करनी होगी, जबकि मध्य प्रदेश सरकार को 120 दिन के भीतर इसे लागू करना होगा। इसके बाद ई-रिक्शा की संख्या, रूट, परमिट और डिजाइन से जुड़े नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
यानी करीब एक दशक से बिना स्पष्ट व्यवस्था के चल रहे ई-रिक्शा अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद नियमों के दायरे में आते नजर आ रहे हैं।