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MP News: ग्वालियर में बनते हैं तिरंगे, यहां का ध्वज संसद-लाल किला-दूतावास सहित 20 राज्यों में फहराया जाता है

Fri, 15 Aug 2025 05:39 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर

सार

ग्वालियर स्थित मध्य भारत खादी संघ उत्तर भारत की एकमात्र संस्था है, जहां राष्ट्रीय ध्वज का निर्माण होता है। यहाँ 90% महिलाएं तिरंगे का निर्माण करती हैं। वर्ष 2025 में अब तक 50,000 से अधिक तिरंगे बनाकर देश के 20 राज्यों में भेजे जा चुके हैं, जिनकी कीमत डेढ़ करोड़ से अधिक है। 
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ग्वालियर में बनते हैं तिरंगे - फोटो : अमर उजाला

हमारे देश की आन-बान-शान तिरंगा जब लहराता है तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। उत्तर भारत में ग्वालियर एकमात्र जगह है, जहां राष्ट्रीय ध्वज का निर्माण होता है। यहां तैयार होने वाले राष्ट्रीय ध्वज देश के कोने-कोने तक जाते हैं और संसद, लाल किला, दूतावास जैसी इमारतों पर लहराते हैं।

ग्वालियर में हमारे राष्ट्रीय ध्वज का निर्माण करने वाली संस्था मध्य भारत खादी संघ है। यह उत्तर भारत की पहली संस्था है, जहां पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जा रहे हैं। संस्था में तैयार हो रहे राष्ट्रीय ध्वज देश के अलग-अलग कोनों में पहुंचते हैं। यहां के बने तिरंगे सरकारी, गैर सरकारी इमारतों पर शान से लहराए जाते हैं। सबसे खास बात यह है सिर्फ साल 2025 में अभी तक यहां से 50 हजार से अधिक हमारे तिरंगे देश के कोने-कोने में 20 राज्यों में पहुंच चुके हैं। इनकी कीमत लगभग डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा है। ये देश की यह इकलौती इकलौती संस्था है जहां पर 90 फीसदी महिला कर्मचारी राष्ट्रीय ध्वज का निर्माण कर रही हैं। यहां पर कपड़ा काटने से लेकर उनको तैयार और उनकी टेस्टिंग महिलाएं ही करती हैं। 

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ग्वालियर में बनते हैं तिरंगे - फोटो : अमर उजाला
पूरे देश में हमारे राष्ट्रीय ध्वज तीन जगह तैयार होते हैं जिसमें कर्नाटक के हुबली, मुंबई और उत्तर भारत में एक मात्र जगह ग्वालियर में तैयार होते हैं। राष्ट्रीय ध्वज निर्माण इकाई की प्रभारी नीलू ने बताया कि यहां पर अलग-अलग साइज के राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जाते हैं। विशेषकर यहां 2 वाई 3, 3 वाई 4.50 और 4 वाई 6 के राष्ट्रीय ध्वज तैयार होते हैं। हमारे राष्ट्रीय ध्वज को तैयार करने के लिए लगभग 20 टेस्टिंग से होकर गुजरना पड़ता है और तय मानकों का विशेष ख्याल रखा जाता है। इसमें कपड़े की क्वालिटी, चक्र का साइज, रंग जैसे मानक शामिल हैं। किसी भी आकार के तिरंगे को तैयार करने में उनकी टीम को 5 से 6 दिन का समय लगता है जांच के बाद ही हमारा राष्ट्रीय ध्वज पूरी तरह तैयार होकर बाहर निकलता है।

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ग्वालियर में बनते हैं तिरंगे - फोटो : अमर उजाला
मध्य भारत खादी संघ के सचिन रमाकांत शर्मा ने बताया केंद्र की स्थापना सन 1925 में चरखा संघ के तौर पर हुई थी। साल 1956 में मध्य भारत खादी संघ को आयोग का दर्जा मिला। इस संस्था से मध्य भारत की कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां भी जुड़ी हैं। इसके बाद सन 2016 में इस संस्था को प्रमाणित राष्ट्रीय ध्वज का निर्माण करने की मान्यता प्राप्त हुई। तब से लगातार यहां पर राष्ट्रीय ध्वजों का निर्माण किया जा रहा है। 
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