ग्वालियर में कार्बाइड गन से चोटिल होने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कल तक यह संख्या 19 थी, जो आज बढ़कर 36 हो गई। यह आंकड़े शहर के जयारोग्य अस्पताल, जिला अस्पताल और बिड़ला-रजन ज्योति नेत्रालय से मिले हैं। फिलहाल इन लोगों की आंखों की रोशनी वापस लौट पाएगी या नहीं, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।
डॉक्टरों के अनुसार 36 में से आठ लोगों की आंख में गंभीर चोटें आई हैं। चार लोगों की कॉर्निया जलकर सफेद हो गई है और इनका इलाज ऑपरेशन के जरिए किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि आंख की स्थिति का पूरा अनुमान कम से कम सात दिन बाद ही लगाया जा सकेगा।
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गुरुवार की शाम को पुलिस ने कलेक्टर द्वारा धारा 163 लागू होने के बाद कार्बाइड गन के क्रय-विक्रय व उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था। आदेश आने के बाद पुलिस ने छानबीन की तो इंदरगंज थाना स्थित झाडू वाला मोहल्ला एक युवक कार्बाइड गन का विक्रय करता मिला। पुलिस ने शाहिद अली को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। वहीं कार्बाइड गन के शिकार बच्चे और महिलाओं का कहना है कि इस गन ने उनकी आंखों की रोशनी छीन ली है, वे चाहते हैं कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, जिन्होंने इसका निर्माण किया है।
बहरहाल बाजार में 100 से 200 रुपए में मिलने वाली यह गन अब खतरनाक ट्रेंड बन चुकी है। इसमें भरा कैल्शियम कार्बाइड पानी के संपर्क में आने पर एसीटिलीन गैस बनाता है। यह गैस विस्फोट के साथ जलती है और कुछ ही सेकंड में आंखों, त्वचा और चेहरे को झुलसा देती है। इतनी बड़ी संख्या में केस आने के बाद आखिर अब पुलिस और प्रशासन की नींद खुली है और उन्होंने इस गन के इस्तेमाल और क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया है।