मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्वास्थ्य विभाग की धांधली सामने आई है। कोविड-19 वैक्सीनेशन का टारगेट करने के लिए कागजों पर वैक्सीनेशन के डोज दिए जा रहे हैं। भितरवार निवासी शिवचरन पाठक की मौत 10 मई 2021 को हुई थी। इसके बाद भी उनके बेटे विनोद पाठक को 17 नवंबर को उनके पिता को दूसरा डोज लगने का मैसेज आया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में दिसंबर के अंत तक पात्र आबादी को 100% वैक्सीनेट करने का टारगेट दिया है। इस टारगेट को पूरा करने के लिए सेकंड डोज के विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। राज्य के कई जिलों में वैक्सीनेशन न करवाने वालों को सुविधाओं से वंचित करने के निर्देश भी जारी हुए हैं। कई सरकारी दफ्तरों में बिना वैक्सीनेशन के प्रवेश तक नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में ग्वालियर का यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
दूसरा डोज दिए जाने के बाद जारी हुआ सर्टिफिकेट।
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खुद स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारी है बेटा
विनोद पाठक स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारी है। उन्हें 17 नवंबर को उस समय बड़ा धक्का लगा, जब उनके मोबाइल पर पिता को वैक्सीन का डोज दिए जाने का मैसेज आया। विनोद के पिता शिवचरन को 9 अप्रैल 2021 को कोविड-19 वैक्सीन का पहला डोज दिया गया था। उसके बाद शिवचरन की मौत का डेथ सर्टिफिकेट भी बन गया था। सेकंड डोज का मैसेज आते ही विनोद पाठक उस सेंटर पर पहुंचे, जहां कथित तौर पर उनके पिता को दूसरा डोज दिया गया था। वहां उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली।
शिवचरन पाठक का मृत्यु प्रमाण पत्र।
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अधिकारी बोले- मामले की जांच कराएंगे
राज्य सरकार के टारगेट को पूरा करने के लिए पहले भी इस तरह की धांधली सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 3 लाख से ज्यादा ऐसे लोग हैं, जिन्हें सेकंड डोज दिए जाने की तारीख निकल चुकी है। यानी इन लोगों ने पहला डोज तो लगा लिया, पर दूसरा डोज लगाने की तारीख पर सेंटर पर उपस्थित नहीं हुए। उनकी ही तलाश कर दूसरे डोज के मैसेज जारी हो रहे हैं। इससे पहले ग्वालियर, शिवपुरी, इंदौर और देवास में भी इस तरह के मामले सामने आए हैं। इस संबंध में ग्वालियर के मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा का कहना है कि मामले की जांच होगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।