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ग्वालियर: छह दिन से प्रदर्शन कर रहे नर्सिंग छात्रों का गुस्सा फूटा, छात्रा की तबीयत बिगड़ने पर हुआ बवाल

Wed, 26 Aug 2026 12:32 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर

सार

छह दिन से आंदोलन कर रहे नर्सिंग छात्रों का गुस्सा कलेक्ट्रेट में फूट पड़ा। इस दौरान छात्रा की तबीयत बिगड़ने और एम्बुलेंस आने में हुई देरी की वजह से छात्र हंगामा करने लगे। छात्र परीक्षा, रिजल्ट और कॉलेजों की मान्यता समेत कई मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
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प्रदर्शन की अनुमति के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे नर्सिंग छात्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नर्सिंग की परीक्षाओं, परिणाम और कॉलेजों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर पिछले छह दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों का प्रदर्शन अब कलेक्ट्रेट पहुंच गया है। कटोरा ताल के फ्लैग पॉइंट पर नर्सिंग का जंतर-मंतर नाम से अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे B.Sc. और GNM नर्सिंग के छात्र बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। इसी दौरान B.Sc. नर्सिंग की एक छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। एम्बुलेंस पहुंचने में देरी के बाद एनएसयूआई जिला अध्यक्ष पवन अपनी कार से छात्रा को अस्पताल लेकर रवाना हुए। घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में काफी देर तक हंगामा हुआ।

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बता दें कि नर्सिंग छात्र पिछले छह दिनों से कटोरा ताल स्थित फ्लैग पॉइंट पर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से बिना अनुमति प्रदर्शन जारी रखने पर एफआईआर की चेतावनी दी गई। इससे नाराज छात्र कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन से फ्लैग पॉइंट पर आंदोलन जारी रखने की अनुमति देने की मांग की। एसडीएम नरेंद्र बाबू यादव के साथ छात्रों की बातचीत भी हुई। छात्रों ने अपनी मांगें रखते हुए कहा कि वे लंबे समय से परीक्षा, परिणाम और कॉलेजों से जुड़ी समस्याओं का समाधान चाहते हैं।

प्रदर्शन के दौरान छात्रा की बिगड़ी तबीयत
इसी बीच प्रदर्शन कर रही आरती, B.Sc. नर्सिंग की छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद डॉक्टरों ने तत्काल उसका प्राथमिक परीक्षण किया। हालत में सुधार नहीं होने पर एम्बुलेंस बुलाई गई, लेकिन उसके पहुंचने में देरी हो गई। इस दौरान एनएसयूआई जिला अध्यक्ष पवन अपनी कार से छात्रा को अस्पताल लेकर रवाना हुए। एम्बुलेंस में देरी को लेकर छात्रों में नाराजगी बढ़ गई और कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा शुरू हो गया। स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची।
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छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ परीक्षा और परिणाम तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने करियर और शिक्षा के अधिकार को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों के अनुसार GNM का तीन साल का कोर्स करीब छह साल तक खिंच गया, जबकि B.Sc. नर्सिंग का चार साल का कोर्स सात साल तक पहुंच गया। छात्रों के मुताबिक B.Sc. नर्सिंग के 2020, 2021 और 2022 बैच तथा GNM के 2021 और 2022 बैच की परीक्षाओं और परिणामों को लेकर लंबे समय से अनिश्चितता बनी हुई है। इसके अलावा छात्र नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता, व्यवस्थाओं, कथित अनियमितताओं और छात्रवृत्ति से जुड़े मुद्दे भी उठा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से बढ़ी चिंता
नर्सिंग कॉलेजों और छात्रों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई ने भी छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। छात्रों के अनुसार जिन कॉलेजों को सीबीआई जांच में ग्रीन चेक नहीं मिलता, वहां परीक्षा कराने पर रोक की स्थिति बन सकती है। ऐसे कॉलेजों के विद्यार्थियों की परीक्षा दूसरे उपयुक्त संस्थानों में कराने की व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है। इससे छात्रों के सामने एक और सवाल खड़ा हो गया है कि जिन कॉलेजों में उन्होंने कई वर्षों तक पढ़ाई की, यदि वही संस्थान परीक्षा के लिए उपयुक्त नहीं माने गए तो उनकी पढ़ाई और करियर का क्या होगा।

छात्रों के सामने दोहरी चिंता
एक ओर ग्वालियर में छात्र कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और परीक्षा से जुड़े मुद्दे अदालत में भी विचाराधीन हैं। ऐसे में छात्रों की चिंता सिर्फ परीक्षा की तारीख और परिणाम तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने बरसों से अटके करियर को लेकर भी आशंकित हैं।
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फिलहाल छात्रों की नजर सुप्रीम कोर्ट के आगामी निर्देशों के साथ प्रशासन के उस निर्णय पर टिकी है, जिसमें वे कटोरा ताल के फ्लैग पॉइंट पर अपना आंदोलन जारी रखने की अनुमति मांग रहे हैं।

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