मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने एजी दफ्तर से विक्की फैक्टरी तक बनी सड़क की गुणवत्ता और निर्माण से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड को लेकर गंभीर नाराजगी जताई है। अदालत ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुख्य अभियंता वी.के. अरख और प्रभारी उप अभियंता दीपक गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिन के भीतर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान सामने आया कि सड़क निर्माण से जुड़ी मूल सरकारी फाइल विभागीय कार्यालय के बजाय उप अभियंता के घर पर रखी थी। अदालत ने सभी संबंधित मेजरमेंट बुक और मूल फाइल को सीलबंद कराकर सरकारी वकील की सुरक्षित अभिरक्षा में रखने के निर्देश दिए।
लैब रिपोर्ट ने खोली दावों की पोल
जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान PWD और राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि सड़क निर्माण के बाद करीब 10 दिन तक यातायात बंद रखा जाना चाहिए था। वकीलों ने कहा कि पुलिस प्रशासन ने दो-तीन दिन में ही वाहनों की आवाजाही शुरू करा दी, जिससे नई सड़क को नुकसान पहुंचा। हालांकि सुनवाई के दौरान PWD की थाटीपुर स्थित प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट सामने रखी गई। रिपोर्ट के संबंध में मुख्य अभियंता वी.के. अरख ने स्वीकार किया कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी। इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए।
अदालत ने विभाग के उप संभागीय अधिकारी बालकृष्ण त्रिपाठी से भी पूछा कि बिल पास होने से पहले जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए नमूने सड़क के किस हिस्से से लिए गए थे। वे नमूनों के सटीक स्थान की जानकारी नहीं दे सके। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में भी नमूने लेने की जगह का स्पष्ट उल्लेख नहीं था।
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दफ्तर के बजाय घर में मिली मूल फाइल
सुनवाई के दौरान मुख्य अभियंता ने अदालत को बताया कि सड़क निर्माण से संबंधित मूल रिकॉर्ड पड़ाव संभाग कार्यालय में रखा है। अदालत ने अधिकारियों को तत्काल रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। करीब आधे घंटे बाद अधिकारी तीन मेजरमेंट बुक लेकर अदालत पहुंचे। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि एजी दफ्तर से विक्की फैक्टरी तक बनी सड़क के निर्माण से जुड़ी मूल सरकारी फाइल प्रभारी उप अभियंता दीपक गुप्ता के घर पर रखी है। बताया गया कि संबंधित अधिकारी उस दिन अवकाश पर थे।
इस जानकारी पर अदालत ने नाराजगी जताई। पीठ ने टिप्पणी की कि मामला अदालत में लंबित होने और जांच रिपोर्ट में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बावजूद सरकारी फाइल का विभागीय कार्यालय के बजाय अधिकारी के घर पर रखा होना गंभीर विषय है। अदालत ने इस स्थिति को रिकॉर्ड छिपाने की आशंका से भी जोड़कर देखा और मामले में अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए।
अदालत कक्ष में सील हुआ सरकारी रिकॉर्ड
अदालत के निर्देश के बाद उप अभियंता के घर से मूल फाइल मंगवाकर पेश की गई। रिकॉर्ड की सुरक्षा और जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अदालत ने तीनों मेजरमेंट बुक और मूल फाइल को सीलबंद लिफाफे में रखवा दिया। इसके बाद सभी दस्तावेज सरकारी वकील की सुरक्षित अभिरक्षा में सौंपने के निर्देश दिए गए।
यह जनहित याचिका ग्वालियर शहर की खराब सड़कों और गड्ढों की स्थिति को लेकर दायर की गई है। सुनवाई के दौरान सड़क निर्माण की गुणवत्ता, जांच के लिए लिए गए नमूनों के विवरण और सरकारी रिकॉर्ड के रखरखाव से जुड़े मुद्दे सामने आए।
दो दिन में जवाब देने के निर्देश
हाईकोर्ट ने मुख्य अभियंता वी.के. अरख और प्रभारी उप अभियंता दीपक गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। पीठ ने मामले में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं। अब संबंधित अधिकारियों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। सड़क निर्माण की गुणवत्ता, सरकारी रिकॉर्ड के रखरखाव और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर अदालत की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।