उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने बिलौआ स्थित खदानों से बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन और ट्रकों में अत्यधिक माल लादने के मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर अत्यंत तल्ख टिप्पणी की है।
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट कहा कि अधिकारी अब भी खनन कारोबारियों के साथ सांठगांठ में लगे हैं। वे गलत लोगों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने का काम कर रहे हैं। अदालत में बिलौआ क्षेत्र में जारी अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर एक जनहित याचिका लंबित है, जिस पर अगली सुनवाई 28 अक्तूबर को तय की गई है।
रिकॉर्ड जब्त न करना समझ से परे
अदालत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि एक ओर राज्य शासन दावा कर रहा है कि क्रशर क्षेत्रों में धर्मकांटा लगे हुए हैं, लेकिन अत्यधिक उत्खनन और ट्रकों में ओवरलोडिंग के गंभीर आरोप लगने के बावजूद अधिकारियों द्वारा उनका रिकॉर्ड जब्त न करना समझ से परे है। शासन ने क्रशर पर तौल कांटा लगाने का सुझाव दिया था और क्रशरों पर कांटा लगा भी हुआ है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने उनकी कोई जांच नहीं की। पीठ ने माना कि अधिकारियों का यह रवैया सीधे तौर पर अवैध खनन करने वालों को बढ़ावा दे रहा है।
आधिकारिक पोर्टल से नहीं जुड़े थे तौल कांटे
मामले की सुनवाई के दौरान शासन की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक खेड़कर ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि सभी खदान संचालकों ने अपने क्रशर क्षेत्र के निकास द्वार पर तौल कांटा लगा रखा था। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इनमें से कोई भी कांटा आधिकारिक पोर्टल से लिंक या एकीकृत नहीं था। इस जानकारी पर अदालत ने गहरा आश्चर्य जताया। उच्च न्यायालय ने सवाल उठाया कि जब मामले का मुख्य आरोप ही अत्यधिक उत्खनन और ओवरलोडिंग से जुड़ा है, तो अधिकारियों ने इन धर्मकांटों का रिकॉर्ड जब्त कर जांच क्यों नहीं की? उच्च न्यायालय ने ग्वालियर कलेक्टर को इस विषय पर स्पष्ट और विशिष्ट जवाब पेश करने का आदेश दिया है।
ये भी पढ़ें- एमपी न्यूज: पति की हत्या में कटी अंगुली बनी सबसे बड़ा सबूत, पत्नी और प्रेमी समेत तीन को उम्रकैद
कलेक्टर को दैनिक सुनवाई का निर्देश
उच्च न्यायालय ने मामले के मूल विवाद को लंबित कारण बताओ नोटिसों से जुड़ा हुआ बताया है। पीठ ने ग्वालियर कलेक्टर को निर्देश दिया है कि वे इन नोटिसों पर रोजाना सुनवाई करें और एक माह के भीतर अंतिम निराकरण सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि कई खदान संचालकों पर राजस्व वसूली प्रमाण पत्र जारी होने के बाद भी वे बेधड़क खनन कर रहे हैं और उनसे कोई वसूली नहीं की गई है। इस पर अदालत ने कलेक्टर को निर्देश दिया कि वे जारी किए गए सभी राजस्व वसूली प्रमाण पत्रों का पूरा ब्योरा और उन्हें निष्पादित करने की तय समय सीमा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें।