मध्य प्रदेश के जनजाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री कंवर विजय शाह यह कहकर विवादों से घिर गए कि छात्रावासों में रहने की इच्छुक लड़कियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके अभिभावकों की है, न कि सरकार की। उनके इस बयान की तीखी आलोचना हो रही है।
शाह ने छात्राओं के अभिभावकों से कहा था कि अगर वे यह लिखकर देंगे कि इन लड़कियों की सुरक्षा की देखभाल खुद करेंगे तभी सरकार उनके लिए छात्रावास बनाने पर विचार करेगी। यदि लड़कियां अकेली रहेंगी तो उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सरकार लड़कियों को छात्रावास तो दे सकती है पर अभिभावकों को उनकी सुरक्षा के इंतजाम खुद करने होंगे। सुरक्षा की जिम्मेदारी लड़कियों और उनके अभिभावकों की है।
इसके अलावा लड़कियों को शाम आठ बजे तक हास्टल में लौट आना चाहिए। शाह के इस बयान पर एतराज जताते हुए जदयू नेता शरद यादव ने कहा कि लड़कियों को सुरक्षा देना निश्चित रूप से राज्य सरकार का काम है। इसे किसी और के ऊपर नहीं छोड़ा जा सकता।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांतीलाल भूरिया ने मंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि इसके लिए राज्य सरकार जवाबदेह है और इससे वह बच नहीं सकती। राज्य में माफिया और गुंडे लड़कियों का उत्पीड़न कर रहे हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई करना सरकार की जिम्मेदारी है।