मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं, ऐसे में महिलाओं की सरकार में भूमिका और सरकार बनाने में भूमिका को लेकर एक बार फिर से चर्चा हो रही है। चुनी हुईं सरकारें भले ही सत्ता में आने के बाद महिलाओं को अधिक पद देने में असमर्थ रहीं हों लेकिन मतदान करने में ये कहीं आगे हैं। अगर 2013 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो 70.09 प्रतिशत महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। जागरूकता के कारण महिलाएं अपने मतदान के अधिकार और इसके महत्व को समझने लगीं हैं।
इसका एक प्रभाव अब राजनीतिक दलों की टिकट वितरण रणनीति पर भी पड़ रहा है। 2013 में जहां मध्यप्रदेश में 30 महिलाओं ने जीत दर्ज की थी। वहीं वर्तमान में प्रदेश के सबसे बड़े दल भारतीय जनता पार्टी ने भी महिलाओं के टिकट कोटे को बढ़ाने का मन बनाया है। इसके पीछे एक कारण महिलाओं के बीच शिवराज सरकार का लोकप्रिय होना है।
यही कारण है कि अभी तक 70 सीटों पर महिलाओं ने टिकट के लिए दावेदारी पेश कर दी है। पार्टी नेताओं का मानना है कि पिछली बार 28 महिलाओं को टिकट दिया गया था, इस बार 35 महिलाओं को टिकट जा सकते हैं।
भाजपा ने शिवराज सरकार की लोकप्रियता को लेकर एक सर्वे किया था, इसके परिणामों से यह साफ हो गया कि शिवराज सरकार महिलाओं के बीच में काफी लोकप्रिय हैं। महिलाओं के मतदान का प्रतिशत, पिछले चुनावों में उनकी सीटों पर जीत जैसे कारण ये साफ कर देते हैं कि प्रदेश में सरकार चुनने में वो अहम भूमिका निभाने वाली हैं।