मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां बढ़ रही हैं तो वहीं पिछले चुनावों के घाव भी सामने आ रहे हैं। भाजपा के पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया का एक वीडियो वायरल हो गया है। इसमें वह कह रहे हैं कि 2018 में हमसे औकात पूछी गई थी। जब हमने मैदान में औकात दिखाई तो भाजपा की सरकार चली गई थी।
कुसमरिया दमोह की पथरिया विधानसभा क्षेत्र के नंदरई गांव में विकास यात्रा के दौरान संबोधित कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में भाजपा के कई नेता और पूर्व विधायक भी शामिल हुए। पूर्व मंत्री कुसमरिया ने भाजपा की नीतियों की चर्चा शुरू की। फिर जनसंघ के समय को याद किया। उन्होंने कहा कि उमा भारती के बाद शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने और बनते आ रहे हैं। बीच में थोड़ी गड़बड़ हो गई थी, वह मेरे कारण हुई थी। मैं क्या करता, मेरी कोई नहीं सुन रहा था। मैंने कहा था कि मुझे पथरिया से नहीं तो बिजावर, महाराजपुर से टिकट दे दो। कहीं से भी टिकिट दे दो, सरकार बनवा दूंगा। उस समय हम लोग इसी तरह यात्राएं करते थे। मैंने प्रदेश अध्यक्ष से कहा कि सच्ची बात यह है कि हमारी सरकार नहीं आ रही है। मैंने उनसे कहा कि बुंदेलखंड के सागर जिले को छोड़कर मैंने सभी जगह से चुनाव लड़े हैं। इस क्षेत्र में मेरी एक पीढ़ी की पहचान है। मुझे टिकट दे दो, मैं तुम्हारी सरकार बनवा दूंगा। वह गलत बात बोल गए थे। मुझे ज्यादा गुस्सा आ गया और उस गुस्से का परिणाम जो हुआ, वह आप सबके सामने हैं।
राकेश सिंह ने औकात दिखाई थी
कुसमरिया का आरोप है कि टिकट को लेकर जब मेरी उस समय के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष (राकेश सिंह) से बात हुई तो उन्होंने मुझसे कहा था कि तुम्हारी इतनी औकात है क्या? मैंने कह दिया था कि अब मैं अपनी औकात फील्ड में दिखाऊंगा, यहां नहीं। मैं इतना सीनियर और तुम कल के अध्यक्ष बने और औकात की बात कर रहे हो। ऐसे में तो किसी को भी गुस्सा आ जाएगा, इसलिए मुझे भी आ गया और भाजपा की सरकार चली गई।
बीमारी की गोली दे दी तो सब ठीक हो गया
कुसमरिया ने कहा कि मैंने जो किया उसके बाद से बहुत कुछ ठीक हो गया। जब थोड़ा-सा झटका लगता है तो सब ठीक हो जाता है । कहीं जब बीमारी लग जाती है, तो जैसे मलेरिया की गोली दी जाती है वैसे ही मैंने भी गोली दे दी। उसके बाद सबको समझ में आ गया। जब समझ में आ गया, तो फिर से सब कुछ ठीक चलने लगा। अब सब ठीक है। मेरे कारण 12-14 विधायक गए थे और अब 25 लौटकर आ गए। अब क्या चाहते हो मय ब्याज के तो दिला दिए हैं।
दमोह और पथरिया से निर्दलीय चुनाव लड़ा था
2018 के विधानसभा चुनाव में डॉ रामकृष्ण कुसमरिया को भाजपा से टिकट नहीं मिला तो उन्होंने पथरिया और दमोह से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। पार्टी ने लखन पटेल को उम्मीदवार बनाया था। कुसमरिया को लगा था कि पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया ने ही उनका टिकट कटवाया है। इस वजह से गुस्से में आकर उन्होंने दो जगह से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। नतीजा यह हुआ कि दोनों जगह से भाजपा के प्रत्याशी चुनाव हार गए। इसके बाद कुसमरिया भाजपा छोड़कर काग्रेस गए और फिर उनकी घर वापसी हुई है।