पीएम आवास योजना के तहत बना मकान (प्रतीकात्मक तस्वीर)
मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना में फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा। राज्य के कई जिलों में तैयार घर बन जाने की तस्वीर सरकारी वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है, लेकिन जमीनी सच्चाई ये है कि उनमें से बहुत से मकानों में निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। जालसाली का आलम जानकर आप चौंक जाएंगे। सरकार की आंखों में धूल झोंकने के लिए इन अधूरे मकानों के सामने की दीवार को खड़ा कर उसमें पुताई कर दी गई और लाभार्थियों के नाम लिखकर उसके फोटो खींचकर निर्माण कार्य पूरा दिखा दिया गया। इस बिनाह पर सरकार से तीन किस्तों का भुगतान भी करा लिया गया।
बताया जाता है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में अपर मुख्य सचिव रहे आरएस जुलानिया की सख्त कार्यप्रणाली के बाद भी प्रधानमंत्री आवास योजना में फर्जीवाड़ा नहीं थमा। ऐसी अनेक मिसालें हैं जो पीएम आवास योजना में चल रहे गोरखधंधे की पोल खोलते हैं।
ये गोरखधंधा चल रहा है मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर जनपद पंचायत के गढ़ी क्षेत्र में। सरकारी रिकॉर्डों की माने तो यहां सैकड़ों मकानों का निर्माण हो चुका है लेकिन असल में उनके छत नहीं बने हैं। ऐसे मकान भी हैं जिनकी नींव अभी खुदना बाकी है लेकिन सरकारी कागजों में वे बनकर तैयार हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उकवा पौण्डी और पाण्डूतला ग्राम पंचायत समेत ज्यादतर पंचायतों में मकान बनाए जा रहे हैं जिनमें सिर्फ रंग-बिरंगी दीवारें खड़ी हैं। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक जनपद पंचायत के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन निर्माणों का निरीक्षण कर लिया है।
कुकर्रा ग्राम पंचायत में ऐसे मकान भी हैं जो कागजों में बनकर तैयार हैं और जो कबाड़ रखने और मवेशी बंधने के काम आ रहे हैं।
मीडिया से बात करते हुए बैहर जनपर सीईओ पुष्पेन्द्र व्यास ने कहा कि वे पीएम आवास योजना के तहत बन रहे मकानों में हो रहे गड़बड़झाले से वे अनजान हैं और इसकी जानकारी उन्हें मीडिया से ही मिल रही है। वे इस मामले की जांच करवाएंगे। वहीं बालाघाट जिला पंचायत की सीईओ मंजूषा राय ने भी इस गोरखधंधे की जानकारी लेने और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।