सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ ने विभाग बंटवारे को लेकर देर रात सिंधिया से चर्चा की। विभागों के बंटवारे को देखते हुए दिग्विजय सिंह ने दिल्ली के कार्यक्रम को रद्द कर दिया। मुख्यमंत्री ने उनकी सभी पहलुओं पर लंबी चर्चा हुई। कमलनाथ ने साफ तौर पर कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी को प्रदेश में लोकसभा चुनाव के बेहतर परिणाम चाहिए तो उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर फ्री हैंड मिलना चाहिए।
राहुल की भी अपनी अलग लिस्ट
कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के कोटे से मंत्री बने कमलेश्वर पटेल, जीतू पटवारी और उमंग सिंघार को महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए जा सकते है। साथ ही नाराज चल रहे विधायकों की नाराजगी भी विभाग बटंवारे में देरी की बड़ी वजह मानी जा रही है। सूत्रों की मानें तो दिग्विजय सिंह से मिलने पहुंचे बिसाहू मंत्री नहीं बनाए जाने से रोने लगे।
वहीं सोमावली से विधायक कंसाना ने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर पक्षपात का आरोप लगाया। कंसाना की मानें तो सिंधिया ने ही केपी सिंह, बिसाहूलाल के नाम भी मंत्रियों की सूची से हटवाए हैं। वरिष्ठ विधायकों केपी सिंह, बिसाहूलाल सिंह और ऐदल सिंह कंसाना की नाराजगी का मामला एक दो दिन में निपटाया जा सकता है। इसके बाद ही विभागों का बंटवारा होगा।
नाथ ने दिग्विजय को बनाया संकटमोचन
नाराज चल रहे विधायकों को मनाने की जिम्मेदारी कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह को सौंपी है। दिलचस्प है कि चुनाव से पहले बागियों को मनाने के लिए भी दिग्विजय ने ही मोर्चा संभाला था। शाम चार बजे दिग्विजय सिंह ने सोमावली विधायक कंसाना से राजधानी के फार्म हाउस में मिलाकर नाराजगी दूर करने का प्रयास किया। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने बिसाहूलाल और कंसाना की मुलाकात कमलनाथ से भी करवाई। सूत्रों की मानें तो दिग्विजय सिंह मंत्रिमंडल में मंत्री रह चुके इन नेताओं को मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का आश्वासन दिया है।