नए कृषि कानूनों को लेकर पूरे देश के साथ-साथ मध्यप्रदेश के मुरैना में भी प्रदर्शन हो रहा है। इस दौरान प्रदर्शन में शामिल कई किसान ऐसे भी हैं, जिन्हें नए कृषि कानून के बारे में पता तक नहीं है। इसके अलावा आंदोलन में ऐसे किसानों के शामिल हैं, जिनके पास जमीन का एक भी टुकड़ा न होने की बात सामने आई। ऐसे किसानों का कहना है कि हम तो संगठन से जुड़े हैं। हमें तो जीप में बैठाकर यहां लाए और झंडे पकड़ा दिए। ऐसे में कृषि कानूनों के विरोध में हो रहे आंदोलनों पर सवाल उठने लगे हैं।
मुरैना में निकाली गई पदयात्रा
जानकारी के मुताबिक, मुरैना में गुरुवार को कृषि कानून के खिलाफ एकता परिषद ने 'सबको सन्मति दे भगवान' पदयात्रा शुरू की। यह यात्रा राजस्थान के धौलपुर तक पैदल और उसके बाद वाहनों से दिल्ली तक जाएगी। इस यात्रा में ग्वालियर-चंबल के अलावा अन्य जिलों के किसान भी शामिल हैं। दरअसल, इन्हीं किसानों में से कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें कृषि कानून के बारे में कुछ भी नहीं पता।
ग्रामीणों को कृषि कानून की जानकारी नहीं
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पदयात्रा में शामिल श्योपुर के बर्धा बुजुर्ग गांव के लड्डू आदिवासी से पत्रकारों ने बातचीत की तो उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि यहां क्या हो रहा है? मैं तो एकता परिषद से कई साल से जुड़ा हुआ हूं। हमें तो जीप में बैठाकर यहां लाए और झंडे पकड़ा दिए। कहां जाएंगे और कृषि कानून क्या है? मुझे कुछ नहीं पता। मेरे पास तो जमीन भी नहीं है। उधर, जौरा के कॉलोनी गांव में रहने वाली गिरिजा बाई का कहना कि हमें सरकार की किसी भी योजना का लाभ आज तक नहीं मिला। हमें न पेंशन तो मिल रही है और न ही राशन। हम तो इसलिए यहां आए हैं। मेरे पास जमीन नहीं है। यह पदयात्रा कहां जाएगी और कृषि कानून क्या है, मैं कुछ नहीं जानती।