देश में अभी 64 विधानसभा सीट और एक लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव होने हैं। इन 64 विधानसभा सीटों में से 28 सीटें मध्यप्रदेश की हैं लेकिन आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का एलान कर दिया है और उपचुनाव की तारीखों का एलान मंगलवार को बैठक करने के बाद किया जाएगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि 29 नवंबर को उपचुनाव की तारीखों का एलान किया जाएगा। मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए 28 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, जिसमें से अधिकतर सीट कांग्रेस के बागी सदस्यों के पार्टी या विधानसभा से इस्तीफा देने और भाजपा में शामिल होने के बाद खाली हुईं थीं।
इन 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव ही बताएंगे कि मध्यप्रदेश में भाजपा की सत्ता बनी रहेगी या कांग्रेस वापसी करेगी। इसके अलावा कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी साख इन उपचुनावों पर टिकी है। जिन 28 सीटों पर उपचुनाव हो रहा है उनमें 16 सीटें सिंधिया के प्रभाव वाले ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की है।
प्रदेश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में उपचुनाव हो रहे हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य में बड़ा राजनीतिक फेरबदल हुआ है। इसी साल मार्च महीन में ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत 22 कांग्रेस विधायकों ने अपना इस्तीफा देकर बीजेपी को ज्वाइन कर लिया था। जिसके बाद कमलनाथ की सरकार अल्पमत में आकर गिर गई।
22 विधायकों के इस्तीफे देने के बाद सीटें खाली हो गईं। जुलाई में बड़ा-मलहरा से कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी और नेपानगर से कांग्रेस विधायक सुमित्रा देवी कसडेकर और मांधाता विधायक ने भी भाजपा ज्वाइन कर ली। इसके अलावा तीन विधायकों का निधन हो गया, इस हिसाब से मध्यप्रदेश में कुल 28 विधानसभा सीटें खाली हो गईं, जिस पर उपचुनाव होना है।
सिंधिया के लिए 22 सीटों में 16 सीटों को बचाना बेहद दी जरूरी है क्योंकि इसमें से 16 सीटें उनके प्रभाव क्षेत्र ग्वालियर-चंबल की हैं। कांग्रेस ने 15 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया है तो वहीं भाजपा की ओर से 25 सीटो पर प्रत्याशी लगभग तय हैं।