चुनाव आयोग ने राज्य में मतदाता सूची में कथित रूप से बड़े पैमाने पर विसंगतियों के आरोप पर जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने कांग्रेस के आरोपों की जांच करने के लिए दो टीमों का गठन किया है। इन टीमों को 7 जून तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
आयोग की टीम जांच के लिए नरेला, भोजपुर, सिवनी-मालवा और होशंगाबाद विधानसभा सीटों का दौरा करेगी। यहां इस बात का पता लगा जाएगा कि किस तरह से विसंगतियां हुई हैं। रविवार को राज्य में पहुंचने के बाद टीम मतदाता सूची में अनेक और फर्जी नाम शामिल होने के बारे में जिम्मेदारी भी तय करेगी।
आपको बता दें कि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश चुनावों से पहले वोटर लिस्ट में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया था।
बीजेपी पर मतदाता सूची में धांधली करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने चुनाव आयोग से जांच की मांग की थी।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए फर्जी मतदाता सूची बनाने में शामिल अफसरों पर भी कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। पार्टी ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया था कि फर्जी वोटरों को रोकने के लिए वह आधार और तकनीक की भी सहायता ले।
60 लाख फर्जी वोटर
रविवार को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने चुनाव आयोग से 1 जनवरी, 2018 को प्रकाशित हुई वोटर लिस्ट में 60 लाख फर्जी वोटरों के होने की शिकायत की थी। उन्होंने पूरी वोटर लिस्ट पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से इस फर्जीवाड़े की जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग को 192 विधानसभाओं में शामिल फर्जी मतदाताओं की सीडी भी सौंपी है।
आधार कार्ड का करें इस्तेमाल
कमलनाथ ने कहा था कि उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ऐसे फर्जी वोटरों की धड़पकड़ करे। यह पूछे जाने पर कि क्या वे वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक करना चाहिए, तो उन्होंने सवाल उठाया कि देश में अभी सभी लोगों के पास आधार कार्ड नहीं हैं, ये चुनाव आयोग के ऊपर है कि वह किस टेक्नोलाजी के जरिए फर्जी वोटरों पर रोक लगा कर सही सूची पेश करे।