मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 8 सीटों पर रविवार को वोट डाले जाएंगे। यहां की भोपाल सीट देश की सबसे चर्चित सीटों में शुमार हो गई है। यहां से कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और भाजपा से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर मैदान में हैं। दिग्विजय कभी प्रज्ञा के बहाने हिंदू आतंकवाद को लेकर भाजपा को घेरते रहे हैं। हालांकि इस चुनाव में वे बदले-बदले से नजर आ रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों से माफी मांगने के साथ शुरू उनका चुनाव अभियान क्षमा याचना पर ही खत्म हुआ।
72 साल के दिग्विजय ध्रुवीकरण को परास्त करने और भाजपा द्वारा दी गई ‘मिस्टर बंटाधार’ की छाप को मिटाने में जुटे रहे। वैशाख की भरी दोपहरी में भी वे गली-गली और मोहल्ले-मोहल्ले करबद्ध होकर घूमे। रास्ते में जो मंदिर आया, वहां शीश नवाकर ही आगे बढ़े। राघोगढ़ के इस राजा ने हर वो चीज की, जिससे वे परहेज करते थे, चाहे गाय को चारा खिलाती हुई तस्वीर हो या साधु-संतों के साथ हवन और रोड जैसे उपक्रम।
दरअसल, उनकी पूरी रणनीति तब बदली जब भाजपा ने मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में आरोपी प्रज्ञा को उम्मीदवार घोषित किया। उन्होंने जुबान पर नियंत्रण किया। मीडिया से बात करने में ऐहतियात बरतते रहे। पीएम नरेंद्र मोदी तक ने हिंदू आतंकवाद के मुद्दे पर उनका नाम लेकर उकसाने की कोशिश की पर दिग्विजय मौन बने रहे।
वहीं, प्रज्ञा कहती हैं कि यह चुनाव उनके लिए धर्म युद्ध है। मुम्बई हमले में शहीद हेमंत करकरे के खिलाफ उनका बयान आलोचना का कारण बना तो संघ और भाजपा को उन्हें संभलकर बोलने की हिदायत देना पड़ी। मगर वे भगवा आतंकवाद शब्द का जनक बताकर दिग्विजय पर बराबर हमले करती रहीं। साढ़े 19 लाख वोटर वाले भोपाल में एक चौथाई अल्पसंख्यक हैं, 2 से ढाई लाख कायस्थ हैं, करीब डेढ़ लाख क्षत्रिय हैं। भाजपा के आलोक संजर मौजूदा सांसद हैं, जो पिछले साल 3 लाख 70 हजार वोटों से जीते थे।
गुनाः सिंधिया के गढ़ में हार-जीत के अंतर पर चर्चा
गुना भी हाईप्रोफाइल सीट है। कारण सिंधिया परिवार है। मौजूदा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया परिवार की विरासत के साथ पांचवा चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने पुराने कांग्रेसी केपी यादव को उम्मीदवार बनाया। भाजपा नेतृत्व पर इस बार भी सिंधिया परिवार के खिलाफ कमजोर उम्मीदवार उतारने का आरोप लगा। पानी और रोजगार बड़े मुद्दे हैं, लोग सिंधिया पर सवाल भी उठाते हैं। लेकिन अंततः बात हार जीत के अंतर पर रुक जाती है। मोदी का हल्ला है, पर महल के आगे कमजोर पड़ने लगता है।
मुरैनाः तोमर को मिल रही कड़ी चुनौती
पिछली बार ग्वालियर-चंबल की इस सीट पर भाजपा का कब्जा था, पर पार्टी ने मौजूदा सांसद अनूप मिश्रा का टिकट काट केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को चुनाव में उतारा है। मोदी लहर के बावजूद तोमर पिछला चुनाव ग्वालियर से महज 30 हजार वोट से जीत सके थे, इसलिए सीट बदल मुरैना से किस्मत आजमा रहे हैं। बसपा ने ऐन वक्त पर रामलखन सिंह की जगह अवतार सिंह भड़ाना को उम्मीदवार घोषित कर दिया। वहीं, कांग्रेस के रामनिवास रावत जातीय समीकरणों के सहारे तोमर को टक्कर देने में लगे हैं।