शहर में सोमवार सुबह से सफाई कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर उग्र आंदोलन और हड़ताल की शुरुआत कर दी है। वाल्मीकि सेना के बैनर तले चल रहे इस प्रदेश-स्तरीय आंदोलन के चलते नगर के समस्त सफाई कर्मचारियों ने सरकारी वाहनों को खड़ा कर दिया है और नगर पालिका परिसर में धरने पर बैठ गए हैं। हड़ताल के पहले दिन ही शहर की कॉलोनियों और गलियों में कचरा गाड़ियां न पहुंचने से सफाई व्यवस्था चरमरा गई, जिससे आम नागरिकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इन मांगों को लेकर प्रदर्शन
आंदोलन की शुरुआत करने से पहले कर्मचारियों ने कलेक्टर कार्यालय, नगर पालिका अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को लिखित रूप में इसकी सूचना दे दी थी। सोमवार को कर्मचारियों ने अपनी आठ सूत्री मांगों को लेकर अपर कलेक्टर (एडीएम) को एक ज्ञापन भी सौंपा। इस दौरान कर्मचारियों ने हड़ताल स्थल पर जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। जिला प्रभारी शंकर खोडे ने बताया कि नगर पालिकाओं और नगर निगमों में चल रही आउटसोर्स (ठेका) पद्धति को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। जिन सफाई कर्मचारियों को सेवा में 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं, उन्हें विनियमित किया जाए। साथ ही, मेडिकल आधार पर अनफिट घोषित कर्मचारियों के स्थान पर उनके परिवार के एक सदस्य को नियुक्ति दी जाए। कर्मचारियों के रिटायरमेंट पर उन्हें 10 लाख रुपये का एकमुश्त भुगतान किया जाए। वहीं ड्यूटी के दौरान मस्टर या विनियमित कर्मचारी की मृत्यु होने पर उनके परिवार को 50,000 रुपये का फंड और परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नौकरी दी जाए। आगामी दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों को एक अतिरिक्त वेतन (बोनस) प्रदान किया जाए।
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जिला अध्यक्ष जितेंद्र मांगलिया और जिला प्रभारी शंकर खोडे ने बताया कि कर्मचारियों को बुनियादी सुविधाओं और अधिकारों की सख्त जरूरत है, जिसके लिए यह प्रदेश-व्यापी लड़ाई शुरू की गई है। यदि आने वाले दिनों में प्रशासन और कर्मचारियों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बनती है, तो धार शहर की सफाई व्यवस्था और अधिक गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। हड़ताल के दौरान बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी धरना स्थल पर मौजूद रहे।