धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद आज (22 मई) का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। कड़े सुरक्षा पहरे के बीच आज सुबह भोजशाला में हिंदू समाज द्वारा पूजन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह करीब 721 वर्षों बाद पहला मौका है, जब शुक्रवार के दिन भोजशाला में हिंदू समाज विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहा है।
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अब्दुल समद ने शांति की अपील की
कमाल मौला मस्जिद के सदर अब्दुल समद ने कहा, “यहां पिछले 700 वर्षों से जुमे की नमाज अदा की जाती रही है। इस परंपरा के प्रभावित होने से समाज में दुख जरूर है, लेकिन हमारी लड़ाई पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी दायरे में है।” सदर और शहर काजी ने उम्मीद जताई है कि शुक्रवार दोपहर तक सुप्रीम कोर्ट से राहत या ‘स्टे’ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिलेगा, तब मुस्लिम समाज पूरे सम्मान के साथ पहले की तरह नमाज अदा करेगा। तब तक सभी लोग प्रशासनिक गाइडलाइन का पालन करें और अमन-चैन बनाए रखें।
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‘कानून तोड़ा तो होगी सख्त कार्रवाई’
धार एसपी सचिन शर्मा ने कहा कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और एएसआई (ASI) के आदेश एवं निर्देशानुसार ही पूजा और अन्य गतिविधियां संचालित होंगी। प्रशासन आदेशों का अक्षरशः पालन कराएगा। भोजशाला प्रांगण, धार्मिक स्थलों और संवेदनशील क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात है। ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। जो भी कानून हाथ में लेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
'अपना सारा काम छोड़कर भोजशाला आए हैं'
वहीं, धार जिले की स्थानीय निवासी विद्या सोनी ने कहा, “हम आज सुबह अपना सारा काम छोड़कर भोजशाला आए हैं। हम बहुत खुश हैं। पहली बार ऐसा हुआ है कि हम शुक्रवार के दिन यहां आ सके हैं। यह सत्य की जीत है। सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता।”