मंदसौर में कुबेरजी के मंदिर पर धनतेरस पर उमड़ी भीड़
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आज धनतेरस के साथ ही दीपोत्सव की शुरुआत हो गई है। आज के दिन धन के देवता भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। मंदसौर के पास खिलचीपुरा में प्राचीन कुबेर मंदिर पर धनतेरस पर दर्शन व पूजा-अर्चना के लिए अलसुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।
मंदसौर के खिलचीपुरा में धन के देवता कुबेर का मंदिर है। यहां कुबेर शिव परिवार के साथ एक ही मंदिर में विराजित हैं। कुबेर की अनूठी मूर्ति शिव परिवार के साथ केवल मंदसौर में है। धनतेरस पर मंदिर में सुबह अभिषेक व पूजा-अर्चना किया गया। उसके बाद परिसर में हवन किया गया। भगवान कुबेर के दर्शन के लिए दिनभर भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।
इतिहासकारों के अनुसार श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर 1200 साल पहले बना मराठा कालीन मंदिर है। इसी मंदिर में स्थापित भगवान कुबेर की मूर्ति गुप्तकाल में सातवीं शताब्दी में निर्मित है। मराठाकाल में धौलागिरी महादेव मंदिर के निर्माण के दौरान इसे गर्भगृह में स्थापित किया था। मंदिर में भगवान गणेश व माता पार्वती की मूर्तियां भी हैं। 1978 में श्री कुबेर की मूर्ति की पहचान हुई। मूर्ति में कुबेर बड़े पेट वाले, चतुर्भुजाधारी सीधे हाथ में धन की थैली तो दूसरे में प्याला धारण किए हैं। नल वाहन पर सवार धन कुबेर की प्रतिमा की ऊंचाई तीन फुट है।
तीन फुट का है मंदिर का गर्भगृह का प्रवेश द्वार
मंदसौर के खिलचीपुरा में स्थित भगवान कुबेर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के लिए तीन फुट का गेट है जिसमे भक्तों को झुककर प्रवेश करना पड़ता है और बिना पीठ दिखाए ही बाहर निकलना होता है।
यति उड़ाकर लाए थे मंदिर
मंदसौर में स्थित कुबेर मंदिर के बारे में एक किंवदंती यह भी है कि इस मंदिर को प्राचीन काल में यति द्वारा उड़ा कर लाया गया था तबसे यह मंदिर खिलचीपुरा में स्थापित है।