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देवास: पहाड़ी पर विराजित हैं मां तुलजा भवानी और चामुंडा माता, नवरात्र में कोई जा रहा नंगे पैर तो कोई घुटनों के बल

Mon, 11 Oct 2021 06:38 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास

सार

देवास की टेकरी पर विराजित मां चामुंडा पूर्ववर्ती पवार राजवंश की कुलदेवी हैं। नाथ संप्रदाय के इतिहास में भी इस मंदिर का जिक्र है। उज्जैन के राजा भृतहरि भी यहां आए थे। हर साल शारदीय नवरात्र में यहां देशभर से लाखों भक्त पहुंचते हैं।
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मां चामुंडा व तुलजा भवानी के दर्शन के लिए देवास में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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मध्यप्रदेश के देवास में स्थित प्रसिद्ध माता टेकरी पर नवरात्रि का उत्साह चरम पर है। लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंच रहे हैं। पहाड़ी पर विराजित मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के दर्शन को लेकर लोग लालायित हैं। शनिवार-रविवार को अपार जनसमूह उमड़ा और शहर की सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं मिली। अब सप्तमी की रात्रि को लाखों भक्तों के आने का अनुमान है।

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नवरात्रि के दौरान इस बार माता टेकरी पर रौनक है। प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किए हैं। पुलिस फोर्स तैनात है। किसी तरह की दिक्कत न हो इसका ध्यान रखा गया है। आमतौर पर वीकेंड और सप्तमी अष्टमी को यहां लाखों लोग आते हैं। इस बार भी शनिवार-रविवार की छुट्टी में माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। दिन में तो भीड़ कम रही लेकिन रात में सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं मिली। पुलिस को यातायात परिवर्तित करना पड़ा। आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर कई जगह वाहनों को रोक रोककर निकाला गया।

टेकरी पर विराजित हैं तुलजा भवानी और चामुंडा माता
देवास की माता टेकरी को रक्त पीठ कहा जाता है। यहां मां तुलजा भवानी और चामुंडा माता विराजमान हैं। कालिका मां का मंदिर भी है। कहा जाता है कि तुलजा भवानी (बड़ी माता) और चामुंडा माता (छोटी माता) बहनें हैं। देवास के बारे में कहा जाता है कि इंदौर के पूर्ववर्ती होलकर राजवंश की कुलदेवी तुलजा भवानी है तो देवास के पूर्ववर्ती पवार राजवंश की कुलदेवी चामुंडा माता है। चामुंडा माता मंदिर के पास ही भैरव मंदिर है। टेकरी मार्ग में अन्नपूर्णा माता, खो-खो माता, अष्टभुजा, हनुमान मंदिर है। शारदीय नवरात्रि में यहां नौ दिनों में लाखों लोग दर्शन करने आते हैं। कई लोग नंगे पैर जाते हैं तो कुछ घुटनों के बल चलकर मां के दरबार में पहुंचते हैं।
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राजा भर्तृहरि आए थे माता टेकरी
देवास की माता टेकरी का नाथ संप्रदाय के साहित्य में भी उल्लेख है। एक पुस्तक में वर्णन मिलता है कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के भाई भर्तृहरि ने वैराग्य होने पर इसी माता टेकरी पर तप किया था। यहां योगेंद्र शीलनाथ जी की धूनी भी है। महाकवि चंदबरदाई का भी टेकरी आने का उल्लेख है। इसके अलावा भी अन्य कई मान्यताएं माता टेकरी से जुड़ी हैं। अंग्रेजी के ख्यात लेखक ईएम फोस्टर ने भी अपनी पुस्तक में देवास को 'हिल ऑफ देवी' लिखा है। पहले यहां घना जंगल था। आने जाने का मार्ग भी दूभर था। धीरे-धीरे विकास होने पर सुविधाएं बढ़ती गई और मार्ग सुगम हुआ।

धरा रह गया नाइट कर्फ्यू का आदेश
नवरात्रि के दौरान देवास जिला प्रशासन ने आदेश जारी किया था कि शहर में रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक रात्रि कफ्यू रहेगा। लेकिन भक्तों की आस्था के आगे आदेश धरा रह गया और रात के समय लाखों लोग माता टेकरी पहुंचे। इस आदेश का कांग्रेस सहित भाजपा नेताओं ने भी विरोध किया था और कहा था कि नवरात्रि के दौरान नाइट कर्फ्यू जैसे आदेश का क्या औचित्य है।

देवास आगरा-मुंबई राजमार्ग के समीप है। महाकालनगरी उज्जैन व मप्र के सबसे बड़े व व्यावसायिक शहर इंदौर होकर भी यहां जाया जा सकता है। देवास का रेलवे व सड़क संपर्क सुगम है। विमान से आने वाले यात्री इंदौर एयरपोर्ट से देवास जा सकते हैं। इंदौर से देवास की दूरी करीब 35 किलोमीटर है।

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