लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती पर इंदौर में उनकी स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए रामपुर कोठी में 150 करोड़ रुपये की लागत से भव्य अहिल्या स्मारक बनाया जा रहा है। इसमें होल्कर इतिहास, थ्री-डी प्रस्तुति और पर्यटक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे।
देवी अहिल्याबाई होल्कर की आज 301वीं जयंती है। होल्कर रियासत की शासिका रहीं देवी अहिल्याबाई के कार्यकाल को समाप्त हुए लगभग 230 वर्ष से अधिक हो चुके हैं, लेकिन उनके द्वारा किए गए जनकल्याण के कार्य आज भी लोगों के स्मरण में जीवित हैं। अहिल्याबाई इंदौर प्रवास के दौरान छत्रीबाग में ठहरी थीं। उसी स्थान पर उनकी प्रतीकात्मक छतरी का निर्माण कराया गया था। अब इंदौर में उनकी स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए रामपुर कोठी में देवी अहिल्या स्मारक का निर्माण किया जा रहा है।
अहिल्याबाई का जीवन परिचय
रामपुर कोठी का इतिहास
महाराजा हरिराव होल्कर के कार्यकाल में रामपुर नवाब के लिए रामपुर कोठी का निर्माण कराया गया था। रामपुर नवाब की होल्कर परिवार से घनिष्ठ मित्रता थी। लालबाग महल के निर्माण से पहले रियासत प्रमुखों की बैठकें यहीं हुआ करती थीं। कोठी के पास हरिराव होल्कर ने एक बावड़ी का भी निर्माण कराया था। बख्शी खुमानसिंह के 19 मार्च 1852 के रोजनामचे में इसका उल्लेख मिलता है। महाराजा तुकोजीराव द्वितीय के समय राज्य के प्रधानमंत्री टी. माधवराव का कार्यालय भी इसी भवन में संचालित होता था। बाद में यहां आरटीओ कार्यालय रहा, जिसे वर्ष 2016 में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्ष 2024 में यह भूमि और भवन अहिल्या स्मारक ट्रस्ट को सौंप दिया गया।
स्मारक में सहेजी जाएंगी अहिल्याबाई की स्मृतियां
रामपुर कोठी में बनने वाला अहिल्या स्मारक तीन चरणों में तैयार किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। फिलहाल पहले चरण में भवन के नवीनीकरण का कार्य जारी है। लगभग साढ़े तीन एकड़ क्षेत्र में यह स्मारक विकसित किया जा रहा है। पहले चरण का करीब 25 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके पूरा होते ही स्मारक आम दर्शकों के लिए खोल दिया जाएगा। रामपुर कोठी में दो बेसमेंट सहित कुल 32 कमरे हैं।
स्मारक में थ्री-डी पेंटिंग्स, लाइट एंड साउंड सिस्टम और ऑडियो प्रस्तुति के माध्यम से देवी अहिल्याबाई के इतिहास को दर्शाया जाएगा। यहां एक विशेष पर्यटक क्षेत्र भी बनाया जाएगा, जिसमें राजबाड़ा, गोपाल मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर और लालबाग जैसी विरासतों की झलक देखने को मिलेगी। स्मारक को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
पुरातत्व विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रवीण श्रीवास्तव के अनुसार भवन के निर्माण और संरक्षण में चूना, मैथी दाना, बेलपत्र, उड़द की दाल, सूखी ईंट का पाउडर और सरस के मिश्रण से तैयार पारंपरिक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, ताकि स्मारक को ऐतिहासिक स्वरूप दिया जा सके।
परिसर के वृक्ष भी रहेंगे सुरक्षित
स्मारक निर्माण के दौरान परिसर के पुराने वृक्षों को काटने के बजाय संरक्षित किया जा रहा है। परिसर में ‘अहिल्या वन’ और ‘अहिल्या घाट’ भी विकसित किए जाएंगे। स्मारक का प्रवेश द्वार होल्करकालीन किले के मुख्य द्वार की तर्ज पर बनाया जाएगा।
अहिल्या ट्रस्ट के सचिव अशोक डागा के अनुसार स्मारक के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान है। पहले चरण के लिए 40 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। लक्ष्य है कि सिंहस्थ 2027 से पहले स्मारक का कार्य पूरा हो जाए, ताकि इंदौर आने वाले पर्यटक होल्कर इतिहास और देवी अहिल्याबाई के योगदान से परिचित हो सकें।
अहिल्या स्मारक ट्रस्ट की प्रमुख सुमित्रा महाजन हैं। ट्रस्ट में उद्योगपति विनोद अग्रवाल, वैष्णव विद्यापीठ के कुलपति पुरुषोत्तमदास पसारी, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, मिलिंद महाजन, संभागायुक्त और कलेक्टर सहित कई लोग सहयोग कर रहे हैं। स्मारक का निर्माण इंजीनियर हिमांशु दूधवड़कर और श्रेया भार्गव के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।