दतिया जिले के शहजाद हत्याकांड मामले में फरियादी राकेश यादव ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। फरियादी का कहना है कि दतिया कोतवाली के तत्कालीन टीआई धीरेन्द्र मिश्रा ने उन्हें झूठे केस में फंसा दिया। उनके मुताबिक टीआई ने केस से नाम हटाने के लिए उनसे रुपयों की मांग की थी, लेकिन जब उन्होंने रुपये देने से इनकार किया, तो उन्हें झूठे आरोपों में जेल भेज दिया गया।
राकेश का कहना है कि जिस वक्त घटना को अंजाम दिया गया उस समय वे अपने घर पर झांसी उत्तर प्रदेश में मौजूद थे। उन्होंने इस बात के सबूत का सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस को सौंपा था, जिसमें वह घर पर नजर आ रहे हैं। लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने यह सीसीटीवी फुटेज अदालत में पेश ही नहीं किया।
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फरियादी ने लगाई न्याय की गुहार
राकेश यादव ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत और अपने सभी साक्ष्य व दस्तावेज संबंधित विभागों में जमा कर दिए हैं। लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है। उनका कहना है कि वे सिर्फ यही चाहते हैं कि अदालत में सच्चाई सामने आए और उन्हें कानूनी न्याय मिले। इस पूरे मामले में अब पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर क्यों सीसीटीवी फुटेज अदालत में नहीं पेश किया गया? और क्या वाकई फरियादी को झूठे केस में फंसाया गया?
जांच के बाद सच आएगा सामने
राकेश का यह भी कहना है कि वह अब न्यायपालिका और उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, ताकि निर्दोष होते हुए भी उन्हें सज़ा न भुगतनी पड़े। दतिया के इस पुराने लेकिन संवेदनशील मामले ने एक बार फिर पुलिस कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि इस नए खुलासे के बाद प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई होती है और क्या राकेश यादव को आखिरकार न्याय मिल पाता है या नहीं। हालांकि, इस मामले में अब तक पुलिस की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है।