फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Damoh News: बहेरा गांव में भीषण जल संकट, 50 फीट गहरे कुएं में उतरकर ग्रामीण भर रहे मटमैला पानी

Tue, 11 Jun 2024 08:46 PM IST
दमोह ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

बहेरा गांव के लोग गांव से दूर जंगल में बने कुएं से जान जोखिम में डालकर पानी ला रहे हैं। इस कुएं में उतरने के लिए पत्थरनुमा खतरनाक सीढ़ियां लगी हैं, जिससे लोग 50 फीट गहरे कुएं के ऊपर व पत्थर पर खड़े होकर पानी खींचते हैं।
विज्ञापन
कुएं में पानी भरने उतर रहे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दमोह जिले के ग्रामीण अंचलों में लोग इतने भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं कि अपनी जान की परवाह किए बिना गहरे कुओं में उतरकर पानी भरने मजबूर हैं। दमोह के बहेरा गांव से इसी तरह की तस्वीर सामने आई है। जहां लोग 50 फीट गहरे कुएं में अपनी जान जोखिम में डालकर नीचे उतर रहे हैं और मटमैला पानी भर रहे। इस कुएं में उतरने के लिए पत्थरनुमा खतरनाक सीढ़ियां लगी हैं, जिससे लोग 50 फीट गहरे कुएं के ऊपर व पत्थर पर खड़े होकर पानी खींचते हैं। जरा सी चूक होने पर जान का खतरा बना रहता है।

विज्ञापन


ग्रामीण बलवंत सिंह, सोने सिंह, रामलाल ने बताया कि हमारे गांव में लगे सभी हैंडपंप जबाव दे चुके हैं, जिससे पूरे गांव के लोगों को इस कुएं के मटमैले पानी का उपयोग करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि गांव में नलजल योजना की टंकी भी बनी है। लेकिन अभी तक उसमें से केवल दो बार ही पानी मिल पाया है। ऐसे में लोग कुएं से ही पानी लेने जाते हैं।

हर साल नीचे जा रहा जल स्तर
जिले का भू-जल स्तर हर साल नीचे खिसक रहा है, जिससे जिले के ग्रामीण अंचलों में भीषण जलसंकट के हालात निर्मित हो गए हैं। भूजल जल सर्वेक्षण विभाग द्वारा हाल ही में मई 2024 के भू-जल स्तर के आंकड़ों के अनुसार बटियागढ़ ब्लॉक में सबसे अधिक 10.58 मीटर भूजल स्तर नीचे गिरा है। इसकी वजह से बटियागढ़ क्षेत्र के 50 से अधिक गांव भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। इन गांव में लगे अधिकांश हैंडपंप पानी की जगह हवा फेंक चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। बटियागढ़ ब्लॉक मुख्यालय के अलावा जलना, सेहरा, मुठिया, सौरई, हरदू, मुहली, बम्हौरी, खड़ेरी, फुटेराकलां, घुराटा, बरौदा, बेलखेड़ी, हारट, फतेहपुर में लोगों को पानी के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। लोगों को पानी के लिए एक से दो किमी दूर खेतों व जंगलों में जाकर पानी लाना पड़ रहा है। 
विज्ञापन


जिले की बड़ी-बड़ी नदियों में भी पर्याप्त पानी नहीं बचा है। सुनार, कोपरा, जूड़ी, शून्य नदी भी जगह-जगह से सूखी पड़ी हैं और उनमें नाममात्र का पानी बचा है। हालांकि, जल संरक्षण के लिए शासन द्वारा हर साल जिले में नदी, नालों पर चेक डैम, स्टॉप डैम, तालाब बनाए जा रहे हैं। बीते साल 100 से अधिक अमृत सरोबार तालाब बनाए गए हैं, लेकिन यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। इसके अलावा करीब एक दर्जन नलजल योजनाएं भी बंद चल रही हैं।

जल स्तर गिरने के भी कई कारण हैं। जैसे पानी का अनावश्यक अधिक मात्रा में प्रयोग, वाहनों को धोने में पानी की बर्बादी। नगर पालिका, नगर पंचायतों की जलापूर्ति में लीकेज से बर्बादी, भूजल दोहन को लेकर कोई नियंत्रण नहीं बरसात के पानी के संचयन के लिए व्यवस्थाएं नहीं।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें