दमोह की जबेरा थाना पुलिस ने पांच महीने पहले मिले अज्ञात नरकंकाल मामले में इस अंधे हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। डीएनए रिपोर्ट के आधार पर मृतक की शिनाख्त हुई और आरोपी पकड़े गए। प्रेम-प्रसंग में इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था।
जबेरा थाना प्रभारी विजय अहिरवार ने बताया कि 29 जून की शाम एक अज्ञात मानव नरकंकाल गुबरा के जंगल में पड़ा होने की सूचना पर मर्ग कायम कर प्रकरण जांच में लिया गया था। इस संबंध में जबलपुर जिले के थाना कटगी में गुम इंसान सतेंद्र पिता गोविंद्र विश्वकर्मा निवासी मोहली की कायमी होने से उक्त गुम इंसान के वारसान भाई महेंद्र, मां रमा, पिता गोविंद्र तथा अन्य रिश्तेदार मौके पर
आए थे। नर कंकाल के पास एक स्टील का कड़ा एवं गमछे का टुकड़ा पडा था, जिसे देखकर मृतक का सतेंद्र के रूप में होना बताया गया था। लेकिन मृतक का शव लेने से इनकार कर दिया था। उसकी बाइक और मोबाइल फोन नहीं मिला।
अज्ञात मृतक का डीएनए परीक्षण कराने मृतक के परिजनों द्वारा एक आवेदन दिया गया था। मृतक का डीएनए परीक्षण कराने पर शव गुम इंसान सतेंद्र पिता गोविंद्र विश्वकर्मा का होना पाया गया। डीएनए रिपोर्ट प्राप्त होते ही साइबर टीम की मदद से दो दिन में ही संपूर्ण प्रकरण में तथ्यों के आधार पर आरोपी मोहन पिता कल्लू एवं आरोपिया शीतल लोधी से पूछताछ की गई, जिसमें पता चला कि षडयंत्र पूर्वक एक राय होकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया।
पत्थर पटककर की थी हत्या
टीआई ने बताया, मृतक का आरोपी लड़की से प्रेम-प्रसंग था। पूछताछ में लड़की के द्वारा बताया गया कि आरोपी के द्वारा उसे ब्लैकमेल किया जा रहा था। इसी के चलते उसने अपने साथी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी और गुबरा के जंगल में बुलाकर सतेंद्र की पत्थर पटककर हत्या कर दी थी। आरोपी के पास से मृतक की बाइक भी बरामद की गई है और आरोपियों को जेल भेज दिया है।