सर बच्ची 6 महीने की है। घर में उसे संभालने वाला कोई नहीं है। इसलिए ड्यूटी कैंसिल कराने आई हूं। यह गुहार दमोह जिले के एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका ने अपर कलेक्टर से लगाई। वह बच्ची को गोद में लेकर ड्यूटी कैंसिल कराने पहुंची थी।
इस जैसे ही कई और सरकारी अधिकारी-कर्मचारी हैं जो ड्यूटी कैंसिल कराने के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें किसी को हार्ट की प्रॉब्लम है तो कोई महिला गर्भवती है। ऐसे एक, दो नहीं बल्कि 80 से अधिक आवेदन हैं। इससे आफिस में आवेदनों का ढेर लग गया है।
बता दें कि दमोह जिले में 1168 पोलिंग बूथ हैं। इस हिसाब से 20 फीसदी तक कर्मचारियों की ड्यूटी ज्यादा लगाई गई है। जो लोग ड्यूटी से छूट के दायरे में आ रहे हैं, उनके आवेदन लिए जा रहे हैं। फाइल बनाकर वरिष्ठ अफसरों के पास भेजी जा रही है। अंतिम फैसला कलेक्टर ही लेंगे। 5 से 10 आवेदन कैंसर ग्रस्त कर्मचारियों के हैं। 10 से अधिक आवेदन गर्भवती महिलाओं के आए हैं जो ड्यूटी करने में असक्षम हैं। पांच आवेदन ऐसी महिला कर्मचारियों के हैं जिनके बच्चे छोटे हैं। पांच आवेदन हार्ट समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों के हैं। 10 से 15 आवेदन ऐसे हैं जिनमें संबंधित अधिकारी, कर्मचारियों का रिटायर्टमेंट करीब है। उन्हें छूट दी जाएगी। कुछ ऐसे आवेदन भी आए हैं जिनके विभाग के सभी कर्मचारियों की ड्यूटी लग गई है। वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों के आवेदन भी आए हैं।
ड्यूटी कैंसिल कराने के लिए पहुंचे कर्मचारियों के आवेदन
विधानसभा चुनाव की ड्यूटी कैंसिल कराने के लिए अधिकारी, कर्मचारियों के हर रोज औसतन पांच से अधिक आवेदन आ रहे हैं। इनमें अधिकांश स्वास्थ्य कारणों के चलते ड्यूटी से छूट पाने की बात बता रहे हैं। इसलिए दमोह में मेडिकल बोर्ड बनाया गया है। यह बोर्ड छूट पाने के आवेदन देने वालों की जांच करेगा। सबसे ज्यादा आवेदन शिक्षा विभाग के हैं। इसमें पति और पत्नी दोनों की ड्यूटी लगी हुई है। ऐसे में वो चाहते हैं कि इसमें से किसी एक की ड्यूटी लगाई जाए। ताकि वो अपने बच्चे की देखभाल कर सकें।