दमोह कोतवाली थाना क्षेत्र के बड़ा पुल पर संचालित अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में सातवीं मौत हो गई। जबलपुर में इलाजरत महिला ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिसका पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। इसके पहले फैक्ट्री मालिक सहित छह महिलाओं की मौत हो चुकी है। लेकिन एक भी पीड़ित परिवार को अभी तक शासन-प्रशासन की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिल सका है।
वहीं, इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश होने के बाद जांच भी पूरी हो गई। लेकिन जांच में कौन दोषी पाया गया, यह अभी तक सामने नहीं आ पाया।
डेढ़ महीने से जबलपुर में इलाजरत थी महिला
फैक्ट्री में हुए विस्फोट में कोतवाली थाना क्षेत्र की गढ़रयाउ निवासी महिला प्रेमलता पति स्वग्रीय दिलीप चक्रवती (45) भी गंभीर रूप से घायल हुई थी, जिसका इलाज डेढ़ महीने से जबलपुर में चल रहा था, जहां उसकी मौत हो गई। मृतिका के बेटे प्रशांत चक्रवती ने बताया कि 22 दिसंबर की रात मां प्रेमलता की जबलपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। 23 दिसंबर को पोस्टमॉर्टम कार्रवाई के बाद अंतिम संस्कार हुआ है। मृतिका के पुत्र प्रशांत चक्रवती का कहना है कि प्रशासन द्वारा कोई भी सहायता नहीं की गई है।
30 अक्तूबर को हुआ था ब्लास्ट
शहर के बीचों बीच बड़े पुल के पास संचालित अवैध पटाखा फैक्ट्री में 30 अक्तूबर को हुए विस्फोट में फैक्ट्री मालिक सहित छह मजदूरों की मौत हो गई थी। ब्लास्ट की घटना के दिन फैक्ट्री मालिक अभय गुप्ता और दो महिला मजदूरों की तुरंत मौत हो गई थी। उसके बाद एक-एक करके तीन महिला मजदूरों की और मौत हुई। छह मजदूर गंभीर घायल हो गए थे। मृतकों में रिंकी कोरी (30), अपूर्वा खटीक (19), फैक्ट्री मालिक अभय गुप्ता (44), रामकली कोष्ठी (47), विनीता रैकवार (55) और उमा कोरी (22) और उसके बाद प्रेमलता चक्रवती की मौत हो गई है। इन पीड़ित परिवार को अभी तक किसी भी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिली है। क्योंकि फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित हो रही थी।
इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच तय समय में नहीं हो पाई है, इसे 30 दिन में पूरा करना था। लेकिन 55 दिन गुजरने के बाद भी जांच का खुलासा नहीं हुआ है। जबकि जांच अधिकारी एडीएम ने दावा किया है कि उन्होंने जांच का प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंप दिया है। बता दें, आईजी ने भी पुलिस को 15 दिन में जांच करने का आदेश दिया था। लेकिन उस जांच का कोई अता-पता नहीं है। ऐसी स्थिति में अभी तक तय नहीं हो पाया है कि सात लोगों की मौत के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है?