परिवहन विभाग द्वारा यात्री बसों के संचालन के लिए अस्थायी परमिट रद्द कर दिए गए हैं और अस्थायी परमिट जारी करने पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में जिले की करीब 60 बसों का संचालन प्राइम रूट से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के रूटों पर बंद हो सकता है। इसके बाद तीर्थ यात्रा और मैरिज पार्टी के नाम पर रूट पर बसें चल रही हैं।
जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट के आदेश पर एक जनवरी से अस्थायी परमिट बंद हो गए हैं। नई व्यवस्था में अब वास्तविक अस्थायी जरूरत होने पर ही बसों को अस्थायी परमिट जारी किए जाएंगे। ऐसे में जो बसें लंबे समय से अस्थायी परमिट लेकर यात्री बसों के तौर पर चल रही थीं, उनका संचालन अब नहीं हो पाएगा। इधर अस्थायी परमिट बंद होने के बाद अब बस संचालक नई व्यवस्था के तहत 7-7 दिनों के लिए मैरिज पार्टी, तीर्थ यात्रा, पिकनिक के नाम पर विशेष परमिट के आधार पर अपनी बसें चला रहे हैं।
हड़ताल पर जाने की तैयारी
जबकि पहले अस्थायी परमिट के लिए एक माह से अधिकतम चार माह के लिए जारी किए जाते थे, लेकिन विशेष परमिट पर बसें चलाने में उन्हें दोगुनी राशि खर्च करनी पड़ रही है। दूसरी ओर विभाग द्वारा सात साल से स्थायी परमिट भी जारी नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में अब बस संचालक आगामी दिनों में हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। इसका खामियाजा आमजनता पर पड़ेगा।
गौरतलब है कि ज्यादातर अस्थायी परमिट पर ग्रामीण अंचलों में जाने वाली बसें चलती हैं। इनमें दमोह से हटा रूट, बनवार, हिंडोरिया, पटेरा, बांदकपुर, झलौन, सबसे अधिक अस्थायी बसों का संचालन होता है। इसके अलावा कुछ बसें दमोह-तेंदूखेड़ा, जबलपुर व सागर रूट पर भी चलती हैं।
सिर्फ चार स्थिति में ही जारी होगा अस्थायी परमिट
परिवहन विभाग के अनुसार किसी भी यात्री वाहन के लिए अस्थायी परमिट मेला स्पेशल, मैरिज पार्टी, तीर्थ यात्रा व पिकनिक के लिए जारी किए जाएंगे। इसके लिए बस संचालक सिटीजन पोर्टल पर शुल्क जमा करते ही उन्हें विभाग द्वारा एक सप्ताह के लिए अस्थायी परमिट जारी होगा। वर्तमान में बस संचालक इसी ऑनलाइन विशेष परमिट के तहत अपनी बसों का संचालन कर रहे हैं। जबकि आदेश में ऐसी बसें रूट पर नहीं चल सकेंगी।
सात साल से नहीं बना एक भी स्थायी परमिट
बस यूनियन के अध्यक्ष शंकर राय का कहना है एक तरफ अस्थायी परमिट बंद किए गए हैं दूसरी तरफ स्थायी परमिट भी नहीं बनाए जा रहे हैं। 2018 से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय सागर से एक भी स्थायी परमिट जारी नहीं हुआ। जबकि 50 से अधिक आवेदन लंबित पड़े हैं। इसका खामियाजा बस संचालकों को भुगतना पड़ रहा है। इस ओर विभाग का कोई ध्यान नहीं है।
परमिट न मिलने पर बंद करना पड़ेगा बसों का संचालन
बस यूनियन के सचिव शमीम कुरैशी ने बताया परिवहन विभाग अब अस्थायी परमिट जारी नहीं करेगा, लेकिन ऑपरेटरों को खड़ी बस का टैक्स प्रति सीट के मान से हर महीने जमा कराना पड़ेगा। बिना परमिट बस का संचालन हुआ, तो पूरी रिस्क संचालक की होगी। दूसरी ओर अस्थायी परमिट बंद होने से अब बस संचालकों को विशेष परमिट के तहत दोगुनी राशि खर्च करनी पड़ रही है। ऐसे में बस संचालक तो बसें चला ही नहीं पाएंगे। स्थायी परमिट भी जारी नहीं किए जा रहे हैं। मजबूरी में आने वाले दिनों में बसों का संचालन बंद करना पड़ सकता है। जल्द ही यूनियन की बैठक होगी।
7-7 दिन के लिए ऑनलाइन परमिट बनाए जा रहे
जिला परिवहन अधिकारी क्षितिज सोनी का कहना है विभाग के आदेश के मुताबिक अस्थायी परमिट अब उन्हीं बसों के जारी होंगे, जिनको वास्तव में अस्थायी परमिट जरूरत है। नई व्यवस्था के तहत घर बैठे 7-7 दिन के लिए ऑनलाइन परमिट बनाए जा रहे हैं।