दमोह के नौरादेही अभयारण्य में शुक्रवार से गिद्ध गणना शुरू हुई और रविवार को तीसरे दिन तारादेही रेंज में गणना के दौरान लाल सिर वाले गिद्ध यानी गिद्ध (रेड हेडेड वल्चर) की प्रजाति मिली, जो काफी वर्षों से विलुप्त हो चुकी है। वन अमले ने इस गिद्ध को अपने कैमरे में कैद कर लिया।
बता दें कि गिद्ध की प्रजाति विलुप्त होती जा रही है। इसलिए सरकार इनके संरक्षण के लिए प्रयास कर रही है, क्योंकि गिद्धों से पर्यावरण संतुलित रहता है। इसलिए समय-समय पर उनकी गणना की जाती है। वर्ष 2021 में गिद्ध गणना हुई थी, उस समय इनकी संख्या 300 थी और अब वर्ष 2024- 25 में गणना हो रही है और इसमें गिद्धों की संख्या बढ़ने का पूरा अनुमान है।
विलुप्त प्रजाति का गिद्ध मिला
गिद्धों की कई प्रजातियां होती हैं। नौरादेही अभयारण्य में वर्तमान समय में गिद्ध की छह प्रजाति पाई जाती हैं। जबकि दमोह जिले का अनुमान मानें तो यहां पर चार प्रजाति के गिद्ध हैं। यदि गिद्धों की हम बात करें तो आठ से दस साल पूर्व दमोह जिले में गिद्धों की संख्या न के बराबर हो गई थी, लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या में फिर से बढ़ोतरी होती जा रही है। तेंदूखेड़ा उप वनमंडल अंतर्गत तारादेही, झलौन, तेंदूखेड़ा और तेजगढ़ रेंज में गिद्ध हैं, जिनकी गणना जारी रही। गिद्ध प्रजाति लुप्त होने की कगार में पहुंच गई थी इसलिए यदि कहीं भी एक साथ दर्जनों गिद्ध किसी राहगीर को मिल जाते हैं तो वह उनको अपने कैमरों में कैद कर लेता है।
इन रेंजों में यह मिले गिद्ध
गिद्ध गणना के दूसरे दिन तेंदूखेड़ा उपवनमंडल की रेंजों में गिद्ध गणना जारी रही। सेहरी, बंजराऊ बैरागढ़ वीट के साथ झलौन में गिद्ध मिले हैं। वहीं बात तेजगढ़ की करे तों यहां परना पटी और बंसीपुर में गणना के दौरान गिद्ध मिले। साथ ही तारादेही में देवरी और सामनापुर में गिद्ध मिले, लेकिन तारादेही में राजगिद्ध भी मिला। इस प्रजाति का गिद्ध कई वर्ष पूर्व जिले में दिखा था। उसके बाद यह गिद्ध अब गणना के दौरान तारादेही वन परिक्षेत्र में मिला है जिसको वन अमले ने अपने कैमरों में कैद किया।
तेंदूखेड़ा उपवनमंडल अधिकारी रेखा पटेल ने बताया कि प्रदेश व्यापी गिद्ध गणना शुक्रवार से शुरू हुई है और रविवार तक चलेगी। तेंदूखेड़ा उपवनमंडल की चारों रेंजों में गिद्ध गणना चल रही है, लेकिन तारादेही वन परिक्षेत्र में गिद्ध गणना के दौरान रेड हेडेड वल्चर प्रजाति का गिद्ध मिला है। यह बड़ी खुशी की बात है, क्योंकि यह प्रजाति लुप्त हो गई थी। कई वर्ष पूर्व इस प्रजाति का गिद्ध सिंगोरगढ़ में देखा गया था। उसके बाद यह प्रजाति तारादेही वन परिक्षेत्र में गणना के दौरान मिली है। अनुमान यही लगाया जा रहा है कि 2021 में जो गिद्ध गणना हुई थी उसकी अपेक्षा इस बार गिद्ध गणना में गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।