विस्फोट मामले में कोई दोषी नहीं
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दमोह शहर के बड़ा पुल पर संचालित अवैध पटाखा फैक्ट्री में 31 अक्तूबर को हुए ब्लास्ट में सात लोगों की जान चली गई थी। इस मामले की मजिस्ट्रेट जांच दो महीने में पूरी होने के बाद अब उसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। लेकिन फिलहाल जांच में सीधे तौर पर कोई दोषी नहीं पाया गया है।
नगर पालिका, राजस्व विभाग और पुलिस की लापरवाही सामने आई है, जिसके चलते इतना बढ़ा हादसा हो गया। हैरानी की बात यह है कि जांच में किसी पर व्यक्तिगत कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़ित परिवार को भी अभी तक कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है। क्योंकि फैक्ट्री अवैध तरीके से संचालित की जा रही थी।
इस हादसे में फैक्ट्री मालिक अभय गुप्ता सहित छह महिलाओं की मौत हो गई थी। सात मौत होने के बाद भी जिला प्रशासन की मजिस्ट्रियल जांच में कोई बड़ा दोषी सामने नहीं आया है। कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने बताया कि जांच रिपोर्ट एसीएस को भेज दी गई है। आगे का निर्णय शासन स्तर पर लिया जाना है। उन्होंने बताया कि इस मामले में तीनों विभागों की लापरवाही सामने आई है। पहली लापरवाही पुलिस विभाग की है, जिसमें बीट सिस्टम के तहत स्थानीय स्तर पर जिसकी ड्यूटी थी, उसे इस बात की जानकारी होनी चाहिए थी। लेकिन यह बात सामने नहीं आई।
इसी तरह नगर पालिका की भी लापरवाही है। इतनी बड़ी अवैध पटाखा यूनिट संचालित होती रही, लेकिन न तो टैक्स को लेकर कोई कार्रवाई की गई और न ही सर्वे में पूछताछ हुई। राजस्व विभाग की भी इसमें लापरवाही सामने आई है। जिन अधिकारियों ने लाइसेंस आदि जारी किए, उसकी जांच और पूछताछ क्यों नहीं की गई। मौके पर वेरीफिकेशन क्यों नहीं किया गया। यह सारी बातें जांच में सामने आईं हैं। इस मामले की जांच रिपोर्ट एक सप्ताह पहले एसीएस को भेजी गई है। वहां से जो कार्रवाई होगी। उस हिसाब से आदेश जारी किए जाएंगे।
पीड़ितों को नहीं मिला मुआवजा
सबसे बड़ी बात यह है कि इस धमाके में फैक्ट्री मालिक और छह महिलाओं की मौत हुई है, जो 80 रुपये प्रतिदिन पर मजदूरी करती थीं और कुछ महिलाएं घायल हुई थीं। लेकिन मृतकों के परिवार के लोगों की किसी भी प्रकार की सहायता राशि नहीं मिली और न ही घायलों को कोई सहायता मिली है।