नौरादेही अभयारण्य और रानीदुर्गावती अभयारण्य को मिलाकर नया टाइगर रिवर्ज वीरांगना रानीदुर्गावती टाइगर रिजर्व बनाया गया है। यहां वर्तमान में 19 बाघों का बसेरा है। सभी बाघों ने पूरे नौरादेही अभयारण्य में आने वाली छह रेंजों में अपना ठिकाना बना लिया है। वर्तमान में 18 बाघों की निगरानी पदमार्क से हो रही है, क्योंकि इन्हें कालर आईडी नहीं लगाई गई है। केवल बाघिन राधा की लोकेशन ही कॉलर आईडी से मिल रही है। क्षेत्रफल के हिसाब से यह देश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बन गया है और इसमें जंगली जानवर के साथ शाकाहारी जानवरों की संख्या भी प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
टाइगर रिजर्व में जो बाघ हैं उन्होंने अपना अलग-अलग ठिकाना बना लिया है, जिससे इन पर निगरानी रखने में टाइगर रिजर्व के अधिकारियों, कर्मचारियों को समस्या आ रही है, क्योंकि पदमार्क के आधार पर ही वन अमला इनकी निगरानी कर पा रहा है।
छह रेंजों के अधीन है अभयारण्य
नौरादेही अभयारण्य छह रेंजों तक सीमित है, क्योंकि दो अभयारण्य को मिलाकर नया टाइगर रिजर्व जरूर बनाया गया है, लेकिन आज तक क्षेत्र हैंडओवर नहीं हुआ है। इसलिए आज भी नौरादेही में केवल छह रेंज आ रही है और उसकी निगरानी नोरादेही अभयारण्य के कर्मचारियों द्वारा की जा रही है। जो नया टाइगर रिजर्व बना है वह अभी केवल नाम के लिए है, क्योंकि जो क्षेत्रफल जोड़ा गया है वह आज भी सामान्य वन मंडल के आधीन में है। इसलिए जब भी बाघों की बात आती है तो आज भी वह केवल नोरादेही की छह रेंजों तक ही होती है। नौरादेही में जो क्षेत्र जोड़ा गया है वह तेंदूखेड़ा और जबेरा का है जहां आज भी दमोह वनमंडल के नियम लागू हैं और इस क्षेत्र में न शाकाहारी जानवरों की सख्या बड़ी न मांसाहारी जानवर दिख रहे हैं।
वर्तमान में नौरादेही में 19 बाघ होने की बात अधिकारी कर रहे हैं और सभी वयस्क हो गए हैं। इसलिए अपने भोजन के लिए खुद ही शिकार करते हैं। इन बाघों ने अपना ठिकाना भी अलग-अलग बना लिया है। सभी बाघ अपने-अपने क्षेत्र के स्वयं राजा हैं। कभी कभार यदि इनका मूवमेंट एक दूसरे के आसपास दिखने लगता है तो संघर्ष की स्थति ने बने इसके लिए यहां लगे सुरक्षा कर्मी इनको दूर कराने का प्रयास करते रहते हैं, क्योंकि बाघों में सीमा क्षेत्र को लेकर अक्सर संघर्ष होता रहता है और इसी टेरोटरी फाइट में किशन नामक बाघ की मौत हो चुकी है।
बिना कालर आईडी के घूम रहे बाघों की जानकारी के बारे में अधिकारियों के अनुसार इनकी खोजबीन हाथियों और इनके पदमार्ग से करनी पड़ती है। पदमार्ग से पता चलता है कि कौन सा बाघ किस क्षेत्र में भ्रमण कर रहा है।
नौरादेही के डीएफओ अब्दुल अंसारी ने बताया कि नौरादेही में रहने वाले सभी बाघ अभयारण्य की छह रेंजों में फैल गए हैं। इनकी पुष्टि उनके पदमार्कों से होती है। राधा नामक बाघिन के गले में आईडी कालर है बाकी बाघों की जानकारी उनके पदमार्क से लेनी पड़ती है। कालर आईडी के लिए उच्च अधिकारियों को पत्राचार किया गया है।