दमोह जिले की जबेरा और पथरिया विधानसभा में मंत्री का सूखा एक दशक के बाद खत्म हो गया और दोनों विधानसभाओं के विधायकों धर्मेंद्र सिंह और लखन पटेल को मोहन यादव मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री बनाया गया है। वहीं दमोह और हटा की उम्मीदें टूट गईं, क्योंकि उम्मीद लगाई जा रही थी कि दमोह से आठवीं बार के विधायक जयंत मलैया और हटा से तीसरी बार की विधायक उमा देवी खटीक को मंत्री बनाया जायेगा, लेकिन पहले मंत्रिमंडल में यह नहीं हो सका, लेकिन जिले को दो मंत्री जरूर मिल गए।
जबेरा विधायक धर्मेंद्र सिंह को दूसरी बार जीत हासिल करने पर राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। 10 साल के लंबे इंतजार के बाद इस विधानसभा को मंत्री पद मिला है। रत्नेश सालोमन 1993 से 2003 तक कांग्रेस से विधायक रहते हुए दिग्विजय सरकार में मंत्री रहे। 2003 में भाजपा के चंद्रभान सिंह को जबेरा से विधानसभा का टिकट देकर कांग्रेस के रत्नेश सालोमन के खिलाफ उतारा गया और चंद्रभान सिंह चुनाव जीत गए, लेकिन 2004 में लोकसभा चुनाव में चंद्रभान सिंह को दमोह लोकसभा से प्रत्यासी बनाया गया और वह जीतकर दिल्ली पहुंचे इसके बाद उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया और जबेरा विधानसभा में उपचुनाव हुआ। भाजपा से दशरथ सिंह चुनाव मैदान में थे और कांग्रेस से रत्नेश सालोमान।
इस उपचनाव में दशरथ सिंह को प्रदेश में भाजपा की सरकार होने का फायदा मिला और वह चुनाव जीत गए। 2008 में विधानसभा के आम चुनाव हुए और रत्नेश सालोमन पुनः चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। इसी दौरान 2011 में उनका निधन हो गया और एक बार फिर जबेरा में उपचुनाव हुआ। कांग्रेस की ओर से सालोमन की बेटी तान्या चुनाव मैदान में थी और भाजपा की ओर से दशरथ सिंह थे। दशरथ सिंह ने यह उपचुनाव भी जीत लिया और प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री बने और अब 2023 में किसी विधायक को जबेरा से मंत्री बनाया गया है।