शहर के अंदर ही घूम रहे आवारा मवेशी
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दमोह जिले के मुख्य मार्ग सहित शहरी क्षेत्र में आवारा पशुओं से लोग परेशान हैं। जबकि जिले से ही पशुपालन मंत्री लखन पटेल सरकार में हैं। इसके बावजूद इस समस्या का हल नहीं हो पा रहा हैं। कलेक्टर ने भी आवारा मवेशी की शिकायत के लिए हेल्प लाइन नंबर जारी किया था, लेकिन इस पर शिकायत करने पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है।
सबसे बड़ी बात यह है कि पशुपालन राज्य मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ज्यादा ही परेशानी है। जिससे इस क्षेत्र के किसान अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। पथरिया के किसान अरविंद बहेरिया ने बताया कि आवारा पशुओं से बहुत परेशानी है कोई ध्यान देने वाला नहीं। दमोह कलेक्टर ने नगर पंचायत और जनपदों को आदेशित किया है कि आवारा पशु मिलते हैं तो उन्हें गौशालाओं और गौ अभ्यारण में छोड़ा जाए, लेकिन अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे। आए दिन हादसे हो रहे हैं लोग घायल होते हैं, कई बार मवेशियों की भी मौत हो जाती है लेकिन इस समस्या के समाधान के लिए कोई आगे नहीं आ रहा।
उन्होंने कहा की शनिवार की रात ही जिले के तेंदूखेड़ा क्षेत्र में सड़क पर बैठे 10 मवेशियों की मौत 108 वाहन की टक्कर से हुई थी। पथरिया के एक और किसान जागेश्वर कुर्मी ने कहा कि दमोह मार्ग पर आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है, जिससे उन्हें बहुत परेशानी होती है। क्योंकि यहीं उनकी दुकान है इसलिए कई बार तो हम खुद मवेशियों को खदेड़ देते हैं, लेकिन वह फिर पहुंच जाते हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि यह आवारा पशु फसलों को तो नुकसान पहुंचाते ही हैं मार्ग पर बैठ जाते हैं जिसमें रात के समय आवागमन करने वाले लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं।
शहरी क्षेत्र में बड़ी परेशानी
जिले में जिस तरह से आवारा मवेशियों की संख्या बड़ी है उसी तरह शहरी क्षेत्र में भी लोग आवारा मवेशी से परेशान हैं। कलेक्टर के निर्देश पर नगर पालिका औपचारिकता निभाते हुए मवेशी पकड़ती है, लेकिन कुछ दिन बाद मुहिम बंद हो जाती है। जिससे शहरी क्षेत्र में लगातार आवारा मवेशी बढ़ते जा रहे हैं और इनके हमले से लोग घायल हो रहे हैं। आवारा मवेशियों को लेकर पशुपालन मंत्री लखन पटेल का कहना है कि कार्य योजना बनाकर इस समस्या का समाधान करेंगे, लेकिन कब समाधान होगा यह कुछ निर्धारित नहीं है।