दमोह के कृषि विभाग के उपसंचालक, अकाउंटेंट एवं लिपिक को कृषि विभाग के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल ने एक करोड़ की अनुदान राशि की हेराफेरी के आरोप में निलंबित कर दिया है। अशोक वर्णवाल ने बताया कि दमोह कृषि विभाग के प्रभारी उपसंचालक पीएल कुशवाहा, अकाउंटेंट राजीव खोसला एवं लिपिक रमेश राजपूत द्वारा अनुदान राशि पर 16 बीज उत्पादन समितियों के लिए आये चने के बीज का अनुदान एक ही समिति को मिलीभगत करके आवंटित कर दिया था। इस मामले की शिकायत उन तक पहुंचने पर जांच करने के बाद तीनों को निलंबित किया गया है।
उन्होंने बताया कि जिले में बीज उत्पादन समितियों के लिए अनुदान पर बीज उपलब्ध कराया जाता है। यह समितियां बीज तैयार करने के बाद किसानों को कम कीमत पर ज्यादा प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज देती हैं। जिले में नई और पुरानी मिलाकर 16 बीज उत्पादन समितियों को इस बार अनुदान देने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन प्रभारी उपसंचालक कृषि पीएल कुशवाहा, अकाउंटेंट राजीव खोसला एवं लिपिक रमेश राजपूत ने मिलकर पूरा अनुदान विद्या बीज उत्पादन समिति को दे दिया। इसमें एक से सवा करोड़ रुपये का अनुदान इस समिति के संचालक महेंद्र पांडे को दिया गया है। जबकि अन्य समितियों को किसी भी प्रकार का कोई अनुदान नहीं दिया गया। विद्या बीज उत्पादन समिति के संचालक महेंद्र पांडे हैं और इनके एक भाई प्रदीप पांडे कृषि उपज मंडी दमोह में भी पदस्थ हैं।
बता दें, शासन द्वारा प्रत्येक समिति को अलग-अलग अनुदान पर बीज देने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन कृषि उपसंचालक द्वारा ऐसा नहीं किया। उन्होंने केवल एक समिति से मिलीभगत करके पूरा अनुदान एक ही समिति को दे दिया। जिस पर बाकी समितियों के सदस्यों द्वारा इस बात का विरोध किया गया और प्रमुख सचिव तक इसकी शिकायत किए जाने पर उनके द्वारा शिकायत की जांच कराई गई और मामला सही निकला। जिस पर तीनों को निलंबित कर दिया है। बताया गया है कि अभी कृषि विभाग में जांच के दौरान अन्य करोड़ों रुपये की राशि का गोलमाल उजागर हो सकता है। जिसको लेकर विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।