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Damoh: सराहनीय पहल, माता-पिता के साथ कैद मासूम का संवरेगा भविष्य, जेलर ने स्कूल में कराया दाखिला

Thu, 13 Jul 2023 02:09 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

दमोह जिले की हटा उपजेल के जेलर ने एक अनोखी पहल पेश की है। जेलर ने जेल में माता-पिता के साथ बंद एक बच्ची का स्कूल में एडमिशन कराया है, अब बच्ची रोज जेल से स्कूल जाकर अपना भविष्य संवार रही है।
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जेलर की अनोखी पहल, बच्ची का कराया एडमिशन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दमोह जिले की हटा उप जेल के जेलर ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। जेल में माता पिता के साथ चार दिवारी में कैद रहने वाली मासूम बच्ची का जेलर ने अपने बच्चों के साथ स्कूल में दाखिला करवाया है।  बच्ची जेल से ही रोज स्कूल जाती है और वापस जेल में ही आ जाती है। जेलर के इस अनोखे काम की सभी लोग काफी सराहना कर रहे हैं।
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दरअसल हटा अनुविभाग में रहने वाले प्रहलाद लोधी और उसकी पत्नी हटा उपजेल में  धारा 302, 304, 498 में  तीन साल से बंद हैं। इनके साथ इनकी एक वर्ष की बेटी जेल में साथ आई थी, क्योंकि घर  पर कोई देखभाल करने  वाला नहीं था और अब बेटी चार वर्ष की हो गई है। बीते दिनों जेलर की उस बच्ची पर नजर पड़ी तो उन्होंने उसे पढ़ाने की इच्छा जाहिर की। इसके बाद शासन से अनुमति  लेकर  उसका दाखिला हटा के प्रतिष्ठित निजी स्कूल में कराया गया। अब मासूम बच्ची जेल से स्कूल जाती है।  

बच्ची ने जाहिर की थी पढ़ाई की इच्छा
जेलर नागेंद्र चौधरी ने बताया कि 10 जुलाई को जेल के निरीक्षण के दौरान वह इस बालिका से वह मिले थे। उन्होंने मासूम से स्कूल में पढ़ने की इच्छा जानी तो उसने हां कहकर सिर हिला दिया, लेकिन उसे जेल से अपनी मर्जी से सीधे किसी स्कूल भेज देना जेल मैनुअल के हिसाब से उचित नहीं था। बेटी की इच्छा का सम्मान करते हुए जेलर ने सबसे पहले उसके माता-पिता आरती एवं प्रहलाद लोधी से उनकी सहमति प्राप्त की। इसके बाद पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए न्यायालय से अनुमति प्राप्त की और अपने स्वयं के बच्चों के साथ उसका नाम नगर के प्रतिष्ठित स्कूल में लिखवा दिया। 
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माता-पिता के घर में नहीं कोई जिम्मेदार
मंगलवार को मासूम बच्ची के स्कूल का पहला दिन था, जेल मैनुअल के अनुसार निर्धारित समय पर उसे स्कूल भेजा जाएगा और वापस लाया जाएगा। साथ ही जेल स्थित भोजनशाला से ही उसके लिए लंच तैयार किया जा रहा है। बता दें, मासूम के माता-पिता उपजेल हटा में पिछले तीन साल से बंद हैं। घर में किसी अन्य जिम्मेदार के ना होने के कारण बेटी उनके साथ ही जेल में रहती है।
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