फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीएसटी के फर्जी नोटिस पर लगेगी लगाम: एमपी में लागू हुई डीआइएन और क्यूआर कोड व्यवस्था, जानें क्या है फायदा?

Wed, 07 Oct 2026 07:37 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर

सार

मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर विभाग ने फर्जी नोटिस और विभागीय पत्राचार के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए डीआइएन और क्यूआर कोड व्यवस्था लागू की है। करदाता मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर पत्र की प्रामाणिकता और विभागीय रिकॉर्ड तुरंत जांच सकेंगे।

विज्ञापन
सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर विभाग ने विभागीय पत्राचार को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (डीआइएन) और क्यूआर कोड आधारित नई व्यवस्था लागू की है। यह व्यवस्था एक अक्तूबर से प्रभावी हो गई है। इसके तहत निर्धारित विभागीय पत्रों को एक डिजिटल पहचान दी जाएगी। करदाता मोबाइल से पत्र पर दिए क्यूआर कोड को स्कैन कर उसकी प्रामाणिकता की जांच कर सकेंगे। इससे फर्जी नोटिस, गलत पत्राचार और विभाग के नाम के दुरुपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

फर्जी नोटिस और पत्राचार पर लगेगी रोक

विज्ञापन

नई व्यवस्था लागू होने के बाद केवल विभाग का नाम, मुहर या किसी अधिकारी के हस्ताक्षर वाला पत्र दिखाकर करदाता को भ्रमित करना आसान नहीं होगा। डीआइएन और क्यूआर कोड के माध्यम से यह पता लगाया जा सकेगा कि दस्तावेज वास्तव में विभागीय सिस्टम से जारी हुआ है या नहीं। वाणिज्यिक कर विभाग के आयुक्त अनय द्विवेदी ने बताया कि निर्धारित दस्तावेज पर डिजिटल पहचान और क्यूआर कोड होने से करदाता पत्र की वास्तविकता आसानी से जांच सकेंगे। इससे विभाग के नाम पर होने वाले फर्जी पत्राचार और भ्रम की स्थिति को रोकने में मदद मिलेगी।

पढे़ं: अभिनेता राजपाल यादव की फिर बढ़ी मुश्किलें: सुप्रीम कोर्ट के बाद अब महू कोर्ट में पेशी, जानें क्या है मामला?

पोर्टल पर तुरंत हो सकेगा सत्यापन

विज्ञापन

सत्यापन के लिए करदाता को पत्र पर दिए गए क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन करना होगा। इसके बाद मध्यप्रदेश कर विभाग के पोर्टल पर डीआइएन का सत्यापन किया जा सकेगा। सत्यापन के दौरान डीआइएन के साथ जीएसटीआइएन, करदाता या प्राप्तकर्ता का नाम, पत्र जारी करने वाला कार्यालय और डिस्पैच की तारीख जैसी जानकारी सामने आएगी। इससे करदाता हाथ में आए पत्र का विभागीय रिकॉर्ड से मिलान कुछ ही समय में कर सकेंगे।

इस तरह बनेगी पत्र की डिजिटल पहचान
जीएसटी पंजीकृत करदाता को पत्र जारी करते समय विभाग के कॉरेस्पॉन्डेंस मॉड्यूल में उसका जीएसटीआइएन दर्ज किया जाएगा। सिस्टम इसके आधार पर करदाता का नाम, पैन, सर्किल, कार्यालय या डिवीजन, जिला, राज्य और पिन कोड जैसी जानकारी स्वतः ले लेगा। अधिकारी पत्र की पीडीएफ तैयार कर उसे डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणित करेंगे। पीडीएफ अपलोड होने के बाद सिस्टम यूनिक डीआइएन और क्यूआर कोड तैयार करेगा। यही उस दस्तावेज की डिजिटल पहचान होगी।

यह व्यवस्था केवल पंजीकृत करदाताओं तक सीमित नहीं है। अनरजिस्टर्ड डीलर या किसी अन्य व्यक्ति को भेजे जाने वाले निर्धारित पत्रों में नाम, पूरा पता, जिला, राज्य और पिन कोड दर्ज कर डिजिटल हस्ताक्षर के बाद डीआइएन और क्यूआर कोड जनरेट किया जाएगा। वैधानिक कार्यवाही, प्राधिकरण पत्र और ई-ऑफिस से जारी होने वाले महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें