मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर विभाग ने फर्जी नोटिस और विभागीय पत्राचार के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए डीआइएन और क्यूआर कोड व्यवस्था लागू की है। करदाता मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर पत्र की प्रामाणिकता और विभागीय रिकॉर्ड तुरंत जांच सकेंगे।
मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर विभाग ने विभागीय पत्राचार को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (डीआइएन) और क्यूआर कोड आधारित नई व्यवस्था लागू की है। यह व्यवस्था एक अक्तूबर से प्रभावी हो गई है। इसके तहत निर्धारित विभागीय पत्रों को एक डिजिटल पहचान दी जाएगी। करदाता मोबाइल से पत्र पर दिए क्यूआर कोड को स्कैन कर उसकी प्रामाणिकता की जांच कर सकेंगे। इससे फर्जी नोटिस, गलत पत्राचार और विभाग के नाम के दुरुपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
फर्जी नोटिस और पत्राचार पर लगेगी रोक
पोर्टल पर तुरंत हो सकेगा सत्यापन
इस तरह बनेगी पत्र की डिजिटल पहचान
जीएसटी पंजीकृत करदाता को पत्र जारी करते समय विभाग के कॉरेस्पॉन्डेंस मॉड्यूल में उसका जीएसटीआइएन दर्ज किया जाएगा। सिस्टम इसके आधार पर करदाता का नाम, पैन, सर्किल, कार्यालय या डिवीजन, जिला, राज्य और पिन कोड जैसी जानकारी स्वतः ले लेगा। अधिकारी पत्र की पीडीएफ तैयार कर उसे डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणित करेंगे। पीडीएफ अपलोड होने के बाद सिस्टम यूनिक डीआइएन और क्यूआर कोड तैयार करेगा। यही उस दस्तावेज की डिजिटल पहचान होगी।
यह व्यवस्था केवल पंजीकृत करदाताओं तक सीमित नहीं है। अनरजिस्टर्ड डीलर या किसी अन्य व्यक्ति को भेजे जाने वाले निर्धारित पत्रों में नाम, पूरा पता, जिला, राज्य और पिन कोड दर्ज कर डिजिटल हस्ताक्षर के बाद डीआइएन और क्यूआर कोड जनरेट किया जाएगा। वैधानिक कार्यवाही, प्राधिकरण पत्र और ई-ऑफिस से जारी होने वाले महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा गया है।