एक तरह जहां सुप्रीम कोर्ट दागी नेताओं को लेकर सख्त है। वहीं मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस में दागी विधायकों की पूरी फौज है।
मध्य प्रदेश के 219 विधायकों में से 55 दागी हैं। इन विधायकों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन दागी नेताओं में कई मंत्री भी शामिल हैं।
जिन मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं वे हैं कैलाश विजयवर्गीय, बाबूलाल गौर, अजय विश्नोई और शंकर गुप्ता।
नेशनल इलेक्शन वॉच नाम के एक एनजीओ की राज्य यूनिट की ओर से किए गए एक सर्वे के मुताबिक दागी विधायकों में से 28 सत्तारुढ़ दल भाजपा के हैं और 21 विपक्षी दल कांग्रेस के।
दागी विधायकों की कतार में बहुजन समाजवादी पार्टी भी कम नहीं है। बसपा के तीन विधायक दागी हैं। इस एनजीओ ने 2008 में 219 विधायकों की ओर से दाखिल शपथ पत्रों की पड़ताल के बाद यह खुलासा किया है।
नौ विधायकों ने अधूरा शपथ पत्र दाखिल किया था, जबकि विधानसभा की दो सीटें खाली रही थीं।
इन आंकड़ों का हवाला देते हुए गैर सरकारी संगठन इलेक्शन वॉच ने 25 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए दागी लोगों को उम्मीदवार न बनाने की मांग की है।
एनजीओ ने 2008 में विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले 2965 उम्मीदवारों के शपथ पत्र की जांच की थी।
इनमें से 445 यानी कि 15 फीसदी के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे। कांग्रेस के 216 नामित उम्मीदवारों में से 69 के खिलाफ मामले दर्ज थे।
जबकि बीजेपी के 217 नामित उम्मीदवारों में 48 के खिलाफ आपराधिक मामले थे। वहीं बीएसपी के 207 नामित उम्मीदवारों में से 41 के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे।