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मध्यप्रदेश: युवक की हुई दो बार मौत, परिवार ने डॉक्टरों को बताया जिम्मेदार

क्राइम डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 29 Sep 2018 03:22 PM IST
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मध्यप्रदेश के इंदौर में एक 18 साल का युवक सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। जब उसे इलाज के लिए एमवाई अस्पताल लाया गया तो गुरुवार देर रात डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जबकि शुक्रवार सुबह तक वह जीवित था, उस वक्त उसे पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जा रहा था। मृतक का नाम कैलाश चौहान बताया जा रहा है। कैलाश पूरी रात जीवित था, परिवार को भी लग रहा था कि उनका बेटा वेंटिलेटर पर है। लेकिन डॉक्टरों ने उसे मुर्दाघर में रखा हुआ था।



जानकारी के मुताबिक उसे सड़क दुर्घटना के बाद डायल 108 की सहायता से एमवाई अस्पताल लाया गया। उस वक्त मेडिकल अफसर डॉक्टर आलोक वर्मा ड्यूटी पर थे। डॉक्टर ने कहा कि उन्हें एंबुलेंस टेकनीशियन ने बताया है कि कैलाश की रास्ते में ही मौत हो गई थी। उसकी ईसीजी भी की गई जिससे पता चला कि वह जीवित नहीं है।


वहीं कैलाश का परिवार एक अलग ही कहानी बता रहा है। कैलाश के पिता खिरधर सिंह का कहना है कि डॉक्टर ने उनके बेटे का इलाज नहीं किया, डॉक्टर कह रहे थे कि वह दूसरे मरीजों का इलाज करने में व्यस्त हैं। वह बार बार इंतजार करने को कह रहे थे। उनसे कई बार गुहार लगाई गई कि कैलाश की हालत बिगड़ती जा रही है और उसे तुरंत इलाज की जरूरत है। लेकिन डॉक्टर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे।


कैलाश के पिता ने आगे बताया कि उनके हंगामा करने के बाद भी डॉक्टरों ने खुद इलाज नहीं किया बल्कि उन्हें एक एयरबैग दे दिया। कुछ देर बाद उन्होंने कहा कि कैलाश जीवित नहीं है। लेकिन जब उन्होंने देखा कि कैलाश हाथ पैर हिला रहा है तो वह तुरंत मेडिकल स्टाफ के पास पहुंचे। तब डॉक्टरों ने कहा कि उसके बचने के चांस महज 10 फीसदी हैं इसलिए उसे वेंटिलेटर पर रखेंगे। लेकिन उसे आईसीयू में ले जाने की बजाय मुर्दाघर ले जाया गया।


शुक्रवार सुबह पुलिस परिवार की शिकायत पर अस्पताल पहुंची और उनका बयान लिया। कैलाश के पिता ने कहा कि वह यह देखकर हैरान थे कि उनके बेटे को वेंटिलेटर की जगह मुर्दाघर में रखा गया था। जब पीड़ित के परिवार की ही एक नर्स ने देखा तो उसकी सांसे चल रही थीं। उसे लगा कि वह बच सकता है तो परिजन उसे ग्रेटर कैलाश अस्पताल लेकर गए। जिसके बाद वहां के डॉक्टर विजय पावडे ने उसे मृत घोषित कर दिया।


मामले पर डॉक्टर पावडे का कहना है, 'मेरा अनुभव बताता है कि पीड़ित की मौत उस एक से डेढ़ घंटे के बीच हुई है जब उसे दूसरे अस्पताल में लाया जा रहा था। लेकिन उसकी मौत का सही समय तो पोस्टमार्म रिपोर्ट से ही पता चल पाएगा।' वहीं जांच अधिकारी एमएस खान का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। पुलिस के जांच दल ने अटॉपसी प्रक्रिया की वीडियो तैयार कर साक्ष्य एकत्रित किए हैं।

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